विक्रमोत्सव 2026 को मिला ‘बीटा गोल्ड अवार्ड’, सीएम मोहन यादव को सौंपा जाएगा सम्मान

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विक्रमोत्सव 2026 को मिला ‘बीटा गोल्ड अवार्ड’, सीएम मोहन यादव को सौंपा जाएगा सम्मान

मध्य प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भव्य आयोजन क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर बड़ी पहचान मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट और दूरदर्शी सोच के प्रतीक ‘विक्रमोत्सव 2026’ ने अपनी सफलता का परचम लहराते हुए प्रतिष्ठित BITA Gold Award (बीटा गोल्ड अवार्ड) अपने नाम कर लिया है।

उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित दो दिवसीय ‘हिन्दुस्तान 2.0 नेशनल चिंतन शिविर एवं एक्सपो’ के दौरान विक्रमोत्सव 2026 को ‘गवर्नमेंट इवेंट ऑफ द ईयर’ (Government Event of the Year) के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया। जल्द ही बीटा (BITA) की टीम विशेष रूप से भोपाल आकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यह प्रतिष्ठित अवार्ड सौंपेगी।

इस साल का तीसरा राष्ट्रीय सम्मान

उज्जैन में आयोजित होने वाला विक्रमोत्सव अपनी भव्यता के कारण आज देश ही नहीं बल्कि दुनिया में मिसाल बन चुका है। साल 2026 में यह इस आयोजन को मिलने वाला तीसरा बड़ा राष्ट्रीय सम्मान है।

इससे पहले मई 2026 में नई दिल्ली में आयोजित ‘शो ऑफ इंडिया कॉन्क्लेव’ में भी इस महोत्सव को दो बड़ी श्रेणियां में पुरस्कृत किया गया था:

सांस्कृतिक लाइव इवेंट ऑफ द ईयर श्रेणी में गोल्ड अवार्ड।

लाइव इवेंट में सर्वश्रेष्ठ शासकीय सहभागिता श्रेणी में सिल्वर अवार्ड।

मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार और महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने इस सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत से विकास’ के संकल्प को धरातल पर उतार रही है। यह सम्मान मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक क्षमता और जनभागीदारी की वैश्विक स्वीकृति है।

139 दिनों का ऐतिहासिक और बहुआयामी आयोजन

विक्रमोत्सव को दुनिया का सबसे लंबी अवधि तक चलने वाला सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन माना जाता है। इस वर्ष यह अनूठा उत्सव पूरे 139 दिनों तक चला, जिसे दो बड़े चरणों में संयोजित किया गया था:

प्रथम चरण (महाशिवरात्रि): इस चरण की शुरुआत देश के सुप्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम द्वारा प्रस्तुत ‘शिवोऽहम’ महादेव आराधना से हुई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

द्वितीय चरण (जल गंगा संवर्धन अभियान): 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चले इस चरण का मुख्य उद्देश्य पंचमहाभूतों में से सबसे महत्वपूर्ण ‘जल तत्व’ का संरक्षण और संवर्धन करना था।

कलाकारों का महासंगम: 139 दिनों के इस सफर में 41 से अधिक बहुआयामी सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिनमें 4,000 से अधिक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसके अलावा, सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए धर्मनगरी वाराणसी में भव्य ‘महानाट्य’ का मंचन भी किया गया।

डिजिटल दुनिया में बना नया कीर्तिमान: 17.72 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े

डिजिटल पहुंच (Digital Outreach) के मामले में भी विक्रमोत्सव 2026 ने इतिहास रच दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष महज डेढ़ महीने (7 फरवरी से 24 मार्च 2026) के भीतर इस आयोजन से 17.72 करोड़ से अधिक लोग डिजिटल माध्यमों से जुड़े।

सरकारी सोशल मीडिया और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए जहां 47.85 लाख लोगों तक सीधी पहुंच बनी, वहीं आम जनता द्वारा बनाए गए कंटेंट और विभिन्न ट्रेंडिंग हैशटैग्स के माध्यम से इसकी कुल डिजिटल रीच 17.24 करोड़ के पार दर्ज की गई।

अतीत में भी मिल चुके हैं कई गौरवशाली पुरस्कार

यह पहली बार नहीं है जब इस आयोजन ने सुर्खियां बटोरी हों। विक्रमोत्सव के पिछले संस्करण भी देश-दुनिया में अपनी छाप छोड़ चुके हैं:

वर्ष 2025: ‘ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड’ द्वारा लांगस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर और ‘वाउ’ अवार्ड एशिया द्वारा शासकीय श्रेणी में गोल्ड मेडल मिला था।

वर्ष 2024: इस आयोजन को एशिया का ‘बिगेस्ट रिलीजियस’ अवार्ड प्रदान किया गया था

कुल मिलाकर, विक्रमोत्सव अब केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह व्यापार, कला, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के संगम का एक ऐसा जीवंत मंच बन चुका है जिसने देश में सरकारी आयोजनों के स्तर को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

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