Nirmala Sitharaman

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रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर, निर्मला सीतारमण ने कहा रुपया ठीक चल रहा है….

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रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर तक गिरा। निर्मला सीतारमण ने इसे सामान्य बताया, जबकि कांग्रेस ने 2013 के उनके पुराने बयानों से तुलना कर सरकार पर तंज कसा और सवाल उठाए। 

रुपया के लिए यह आज तक का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण समय है, जब रुपया एक डॉलर की कीमत बराबर 95 रुपया पहुंचा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2013 में जब रुपया डॉलर के मुकाबले 62 पर था तब निर्मला सीतारमण ने इस पर चिंता जताई थी पर आज वही रुपया डॉलर के मुकबले 95 पर है तो सीतारमण का कहना है की रुपया ठीक चल रहा है. यह रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर है, जिसे उसने आज छू लिया। इससे पहले ऐसी गिरावट नहीं देखी गई थी।

इस स्थिति पर देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में कहा, रुपया ठीक चल रहा है। करीब साढ़े तीन साल पहले, अक्टूबर 2022 में, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 82 के स्तर पर था, तब भी गिरावट पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि “रुपया कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है।” बाद में उन्होंने यह भी कहा था कि रुपया अपना संतुलन खुद पा लेगा।

अब सवाल उठता है कि जब मोदी सरकार से पहले यूपीए सरकार के दौरान रुपया 62 के स्तर पर था, तो क्या उस समय भी यही रुख अपनाया गया था? उस दौर में नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर क्या कहते थे? इन सवालों पर विचार करने से पहले यह समझना जरूरी है कि सोमवार को रुपये में यह गिरावट कैसे आई और इस पर विपक्षी दलों की क्या प्रतिक्रिया रही। दरअसल, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 95 के स्तर को पार कर गया। ईरान युद्ध के बाद रुपया करीब 4.1% कमजोर हुआ है। 27 मार्च 2026 को यह 94.82 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को अंतरबैंक बाजार में यह 95.20 रुपये तक पहुंच गया।

रुपये में आई इस गिरावट के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले रुपया “बिल्कुल ठीक चल रहा है।” एक पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ है, हमारी वित्तीय स्थिति बेहतर है। पूरी दुनिया हमारे राजकोषीय घाटे के प्रबंधन की सराहना कर रही है और हमारे विदेशी मुद्रा भंडार भी काफी मजबूत हैं। ऐसे में अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया स्थिर है यह बिल्कुल ठीक चल रहा है।”

अपने लिखित जवाब में वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल भारतीय रुपया ही नहीं, बल्कि वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के बाद कई एशियाई मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई हैं। वित्त मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस ने प्रतिक्रिया देते हुए सरकार पर निशाना साधा और तंज कसते हुए टिप्पणी की कि “गजब फर्जी लोग हैं।”

कांग्रेस ने कसा तंज

कांग्रेस ने निर्मला सीतारमण के पुराने और मौजूदा बयानों को साझा करते हुए उन पर तंज कसा है। पार्टी का कहना है कि जब 2013 में यूपीए सरकार के दौरान रुपया 62 के स्तर पर था, तब निर्मला सीतारमण इसे लेकर गंभीर चिंता जता रही थीं। वहीं अब, जब मोदी सरकार के समय रुपया 95 तक पहुंच गया है, तो वह कह रही हैं कि रुपया “ठीक चल रहा है।”

16 अक्टूबर 2022 को अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में आईएमएफ़ और वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्मला सीतारमण ने अपने बयान में अलग दृष्टिकोण रखा था। रुपये में लगातार गिरावट को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि “रुपया कमजोर नहीं हो रहा, बल्कि डॉलर मजबूत हो रहा है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “भारतीय रुपया अन्य उभरते बाजारों की मुद्राओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।” उनका यह बयान उस समय काफी चर्चा में रहा और विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर आलोचना और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। बाद में एक अन्य बयान में उन्होंने कहा, “रुपया अपना संतुलन स्वयं स्थापित कर लेगा। सरकार पूरी तरह सतर्क है और अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। यदि अर्थव्यवस्था कमजोर होती, तो गिरता रुपया नुकसानदेह साबित होता, लेकिन वर्तमान स्थिति ऐसी नहीं है।”

2013 में, जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उन्होंने यूपीए सरकार पर रुपये की गिरती स्थिति को लेकर तीखे हमले किए थे। एक भाषण में उन्होंने कहा था कि रुपया और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों “मौन” हो गए हैं। उन्होंने रुपये की हालत को बेहद गंभीर बताते हुए इसे “डेथबेड” पर बताया और कहा कि यह “टर्मिनल स्टेज” में है, जिसे तत्काल इलाज की जरूरत है। जब रुपया 60 के पार पहुंचा, तब एक अन्य बयान में उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि रुपया मनमोहन सिंह की उम्र से होड़ लगा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा था कि रुपया “आईसीयू” में है और इसकी यह स्थिति सरकार की नीतियों तथा भ्रष्टाचार का परिणाम है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि रुपया और यूपीए सरकार दोनों की ही वैल्यू खत्म हो चुकी है।

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