अशोक खरात मामले में विवादों में घिरी रुपाली चाकणकर ने महिला आयोग अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और सफाई देते हुए आरोपी पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों रुपाली चाकणकर का नाम एक बड़े विवाद के केंद्र में है, जो कथित तौर पर स्वयंभू ज्योतिषी अशोक खरात से जुड़े मामले के बाद उभरा है। आरोप है कि खरात ने कई महिलाओं के साथ यौन शोषण किया और इस पूरे मामले के सामने आने के बाद चाकणकर के साथ उनके पुराने संबंधों को लेकर सवाल खड़े हो गए।
कुछ तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें दोनों को एक साथ धार्मिक कार्यक्रमों में देखा गया। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि चाकणकर का खरात से करीबी संबंध था और वे उसके साथ रह चुकी थीं, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रुपाली चाकणकर का राजनीतिक सफर महाराष्ट्र की सक्रिय महिला नेताओं में गिना जाता रहा है। पुणे से ताल्लुक रखने वाली चाकणकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेता रही हैं। उन्हें वर्ष 2021 में महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
यह एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है, जिसका काम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके खिलाफ होने वाले अपराधों पर निगरानी रखना है। चाकणकर ने अपने कार्यकाल के दौरान कई महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मुखर भूमिका निभाई और राजनीतिक तौर पर भी काफी सक्रिय रहीं।
हालांकि, अशोक खरात प्रकरण ने उनके पूरे राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खरात पर आरोप है कि वह महिलाओं को आध्यात्मिक उपचार और पूजा-पाठ के नाम पर बहलाकर उनका शोषण करता था।
जैसे ही यह मामला सामने आया, चाकणकर के साथ उसके पुराने संबंधों को लेकर विवाद गहराता गया। विपक्षी दलों ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और पीड़ितों को प्रभावित करने की कोशिश की, हालांकि इन आरोपों को लेकर अभी तक कोई ठोस कानूनी पुष्टि नहीं हुई है।
बढ़ते राजनीतिक दबाव और विवाद के बीच अंततः रुपाली चाकणकर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से सफाई देते हुए कहा कि वे अशोक खरात को एक समय अपना “गुरु” मानती थीं, लेकिन उन्हें उसके खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जानकारी नहीं थी।
उन्होंने यह भी कहा कि जो वीडियो और तस्वीरें सामने आई हैं, वे पुराने हैं और उनका किसी भी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। चाकणकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि खरात दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
इस पूरे प्रकरण ने न केवल रुपाली चाकणकर की छवि को प्रभावित किया है, बल्कि यह भी सवाल खड़े किए हैं कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनी संस्थाओं में बैठे लोगों की जवाबदेही कैसे तय की जाए।
पहले भी चाकणकर कई राजनीतिक विवादों को लेकर सुर्खियों में रही हैं, जहां उन पर मामलों के राजनीतिकरण के आरोप लगे थे। फिलहाल, अशोक खरात मामले की जांच जारी है और इसके साथ ही यह देखना अहम होगा कि आने वाले समय में चाकणकर की राजनीतिक भूमिका किस दिशा में जाती है।
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