चुनाव आयोग में दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला के खिलाफ शिकायत, हिंदू वोटरों को परेशान करने का आरोप
भोपाल में एक प्रतिनिधि मंडल ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने हिंदू मतदाताओं को निशाना बनाकर उन्हें परेशान करने की कोशिश की है। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस मामले में की गई कथित गलत शिकायत पर कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों का कहना है कि जिन मतदाताओं को लेकर शिकायत की गई थी, उनकी जांच पहले ही रिटर्निंग ऑफिसर और बीएलओ द्वारा की जा चुकी है। इस जांच में सभी मतदाता सही पाए गए थे और उनके दस्तावेज भी वैध पाए गए थे। इसके बावजूद दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया।
प्रतिनिधि मंडल ने आरोप लगाया कि शिकायत के दौरान कुछ लोगों पर दबाव बनाकर उनसे एफिडेविट पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। उनका कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम को लेकर सवाल उठाए गए, उन्होंने अब निर्वाचन अधिकारी के सामने अपने काउंटर एफिडेविट भी जमा कराए हैं। इन काउंटर एफिडेविट में उन्होंने साफ कहा है कि वे उसी पते पर रह रहे हैं और उनके नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हैं।
इस मामले में रहवासी मतदाता पोखन लाल साहू और हमीर सिंह यादव ने भी निर्वाचन अधिकारी को अपने काउंटर एफिडेविट सौंपे हैं। उन्होंने कहा कि उनसे जबरन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने की कोशिश की गई थी। प्रतिनिधि मंडल का दावा है कि इस पूरे मामले में मतदाताओं को डराकर और दबाव बनाकर शिकायत को सही साबित करने की कोशिश की गई।
दरअसल, 7 मार्च को कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला ने चुनाव आयोग से शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि नरेला विधानसभा क्षेत्र की रतन कॉलोनी के एक घर में करीब 30 लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं। इस शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच कराई।
प्रतिनिधि मंडल के अनुसार एसडीएम स्तर पर हुई जांच में यह पाया गया कि दिग्विजय सिंह और मनोज शुक्ला का दावा सही नहीं था। जांच में सामने आया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में दर्ज हैं, वे उसी पते पर रह रहे हैं और उनके दस्तावेज भी सही पाए गए हैं।
प्रतिनिधि मंडल ने चुनाव आयोग से मांग की है कि इस तरह की झूठी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मतदाताओं को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। उनका कहना है कि चुनावी माहौल में इस तरह की शिकायतों से मतदाताओं में भ्रम और डर का माहौल बनता है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक नहीं है।
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