खामेनेई की मौत पर क्यों हो रहे है भारत में आंदोलन? जानें वजह!
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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अमेरिका और इसराइल के कथित संयुक्त हमलों में मौत के बाद भारत में भी लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कश्मीर, लखनऊ और देश के अन्य अन्य हिस्सों में शिया समुदाय के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं जबकि कई प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं और राजनीतिक नेताओं ने भी इस घटना पर गहरा शोक और नाराज़गी जताई है।
इस घटना ने न सिर्फ़ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है बल्कि भारत की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति से जुड़ी चिंताओं को भी सामने ला दिया है।
कश्मीर और लखनऊ में ख़ामेनेई की मौत पर प्रदर्शन
ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि के बाद श्रीनगर में शिया समुदाय के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। हाथों में बैनर और नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इसी तरह लखनऊ में भी शिया महिलाओं और पुरुषों ने विरोध जताया। एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह हत्या धोखे से की गई है और इससे विचारों को दबाया नहीं जा सकता। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति बनने से रोका जा सके।
मौत पर किस धार्मिक नेता ने क्या कहा?
देश के कई प्रमुख शिया धर्मगुरुओं ने ख़ामेनेई की मौत को मुस्लिम दुनिया के लिए बड़ी क्षति बताया। मौलाना कल्बे जवाद ने इसे “सदी के सबसे दुखद घटनाक्रमों में से एक” करार देते हुए कहा कि ख़ामेनेई ने हमेशा दबे-कुचले लोगों की आवाज़ उठाई।
इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन ख़ालिद रशीद फ़रंगी महली ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से युद्ध रोकने की अपील की। उन्होंने यह भी मांग की कि इस हत्या के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुक़दमा चलाया जाए।
राजनीतिक गलियारों में चिंता, सरकारें सतर्क
राजनीतिक स्तर पर भी इस घटना पर प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। उमर अब्दुल्लाह ने ईरान में हो रहे घटनाक्रम और ख़ामेनेई की मौत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा या अशांति से दूर रहने की अपील की।
उन्होंने प्रशासन से भी संयम बरतने और शोक मनाने वालों को शांतिपूर्वक अपनी भावनाएँ व्यक्त करने देने की बात कही। वहीं, पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने इस घटना को इतिहास का शर्मनाक मोड़ बताते हुए कुछ मुस्लिम देशों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
विदेशों में फंसे भारतीयों को लेकर सरकार का क्या है सोचना
इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। जनता दल यूनाइटेड के नेता संजय झा ने बताया कि खाड़ी देशों से लगातार फोन आ रहे हैं और हालात सामान्य होने तक लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे बंद होने के कारण फिलहाल आवाजाही मुश्किल है, लेकिन स्थिति सुधरते ही सुरक्षित रास्ता निकाला जाएगा। राज्य और केंद्र सरकारें विदेश मंत्रालय के संपर्क में रहकर वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की अमेरिका और इसराइल के कथित संयुक्त हमलों में मौत के बाद भारत में भी लोगों की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
भारत में युद्ध का असर और आगे की रणनीति
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत ने भारत में धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर गहरी प्रतिक्रिया पैदा की है। यह घटना सिर्फ़ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रही बल्कि भारत जैसे देशों में भी भावनात्मक और कूटनीतिक प्रभाव छोड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत सरकार के लिए संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है एक ओर आंतरिक शांति और सामाजिक सौहार्द, तो दूसरी ओर विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक हित।
यह रही वजह!
मुख्य तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद भारत में आंदोलन इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि शिया समुदाय उन्हें धार्मिक और वैचारिक प्रतीक मानता है। कई लोग उनकी हत्या को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और मुस्लिम दुनिया पर हमला मान रहे हैं, इसी वजह से विरोध और शोक प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
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