NCERT की नई पहल: कक्षा 8 की किताब में क्रांतिकारियों को मिला सही सम्मान, लोगों ने किया मुगल चैप्टर हटाने का दावा!
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद National Council of Educational Research and Training (NCERT) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक का दूसरा भाग जारी कर दिया है। नई किताब में भारतीय इतिहास को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।
परिषद का कहना है कि पाठ्यक्रम में ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनसे छात्रों को देश के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक आंदोलनों की अधिक संतुलित और तथ्यपरक जानकारी मिल सके।
खास बात यह है कि पहले की पुस्तकों में मौजूद कुछ शब्दों और संदर्भों को संशोधित किया गया है, ताकि स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका को सही रूप में दर्शाया जा सके।
स्वतंत्रता सेनानियों की छवि को किया गया स्पष्ट
नई पुस्तक में यह सुधार किया गया है कि ब्रिटिश शासन के दौरान जिन क्रांतिकारियों को ‘अतिवादी’ या ‘आतंकवादी’ कहा जाता था, उन संदर्भों को अब हटाया गया है। NCERT के निदेशक Dinesh Prasad Saklani के अनुसार, पहले की किताबों में औपनिवेशिक दृष्टिकोण की झलक मिलती थी, जिसे अब बदला गया है।
उनका कहना है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को उसी सम्मान के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। संशोधित संस्करण में राष्ट्रवादियों और क्रांतिकारियों को स्पष्ट रूप से उसी नाम से संबोधित किया गया है, जिससे छात्रों में सही ऐतिहासिक समझ विकसित हो सके।
नए अध्यायों में शामिल ऐतिहासिक व्यक्तित्व और आंदोलन
नई किताब में कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों और आंदोलनों को जोड़ा गया है। छात्रों को अब Swami Vivekananda के जीवन और उनके शिकागो धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के बारे में पढ़ाया जाएगा। साथ ही, आदिवासी नेता Birsa Munda के संघर्ष और योगदान को भी विस्तार से शामिल किया गया है।
इसके अलावा 19वीं सदी के Kuka Movement (नामधारी आंदोलन) का उल्लेख किया गया है, जिसका नेतृत्व बाबा राम सिंह ने किया था। इसी क्रम में Paika Rebellion को भी पुस्तक में स्थान दिया गया है, जिसे औपनिवेशिक शासन के खिलाफ शुरुआती सशस्त्र विद्रोहों में गिना जाता है।
इन अध्यायों का उद्देश्य छात्रों को यह बताना है कि स्वतंत्रता की लड़ाई केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं थी, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने-अपने तरीके से संघर्ष कर रहे थे।
‘काला पानी’ और राष्ट्रवादी प्रतीकों का समावेश
पुस्तक में अंडमान स्थित Cellular Jail का भी वर्णन है, जिसे ‘काला पानी’ के नाम से जाना जाता था। यहां अनेक क्रांतिकारियों को कठोर सजा दी गई थी। किताब में उन स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख किया गया है,
जिन्हें इस जेल में बंद रखा गया। साथ ही ‘भारत माता’ जैसे राष्ट्रवादी प्रतीकों को भी समझाया गया है, ताकि छात्र उस दौर की भावनात्मक और वैचारिक पृष्ठभूमि को समझ सकें।
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NCERT का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य शिक्षा को औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त कर भारतीय दृष्टिकोण को प्रमुखता देना है। नई पुस्तक के जरिए छात्रों को इतिहास का व्यापक और संतुलित चित्र दिखाने की कोशिश की गई है, जिससे वे देश के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक जागरण को बेहतर ढंग से समझ सकें।
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