NH-45 पर पांच साल पुराना रेल ओवर ब्रिज ढहा, 628 करोड़ की परियोजना का यह क्या हुआ?

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NH-45 पर पांच साल पुराना रेल ओवर ब्रिज ढहा, 628 करोड़ की परियोजना का बुरा हाल हुआ

शहपुरा के पास अचानक गिरा पुल, बाल-बाल बचे वाहन चालक

जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर शहपुरा क्षेत्र में रविवार दोपहर एक रेल ओवर ब्रिज का चालू हिस्सा अचानक ढह गया। पुल गिरते ही यातायात थम गया और क्षेत्र में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि कई वाहन चालक किसी तरह ब्रेक लगाकर पीछे हटे। राहत की बात यह रही कि बड़ी जनहानि की सूचना नहीं मिली, पर मार्ग पूरी तरह बंद करना पड़ा।

मरम्मत के बावजूद चालू हिस्से पर बढ़ा दबाव, संरचना नहीं झेल सकी भार

पुल का एक हिस्सा पहले से क्षतिग्रस्त था और दिसंबर 2025 से मरम्मत के लिए बंद रखा गया था। प्रशासन ने यातायात दूसरे हिस्से से जारी रखी था, जिस पर लगातार भारी वाहनों का दबाव बढ़ रहा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि असंतुलित लोड और पहले से मौजूद दरारों ने संरचना को कमजोर कर दिया था। अंततः यही हिस्सा रविवार को भार सहन न कर सका और धराशायी हो गया।

628 करोड़ की परियोजना, गारंटी अवधि में ही उजागर हुई गुणवत्ता

यह पुल 54 किलोमीटर लंबे फोर-लेन मार्ग परियोजना का भाग था, जिसका निर्माण लगभग 628 करोड़ रुपये की लागत से हुआ था और 2020 में पूर्ण घोषित किया गया था।

महज पांच वर्ष में ही पुल का क्षतिग्रस्त होना निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार इतने कम समय में किसी आरओबी का ढहना सामान्य परिस्थितियों में संभव नहीं माना जाता, जब तक कि सामग्री या डिज़ाइन स्तर पर खामी न हो।

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ब्लैकलिस्टेड निर्माण एजेंसियां और हस्तांतरण विवाद

निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों को गुणवत्ता शिकायतों के कारण पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था

वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने स्पष्ट किया कि उसने इस मार्ग का निर्माण नहीं कराया और गुणवत्ता खामियों के चलते इसका औपचारिक हस्तांतरण भी स्वीकार नहीं किया गया था।

इससे परियोजना निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यातायात बाधित, जांच की मांग हुई तेज

पुल गिरने के बाद जबलपुर-भोपाल मार्ग बंद कर दिया गया है और वाहनों को पाटन व चरगवां मार्ग से डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे यात्रा दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों ने उच्च स्तरीय तकनीकी जांच तथा दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि राज्य के अन्य नए पुलों और राजमार्ग संरचनाओं का भी सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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