शशि थरूर का ‘फाइनल’ फैसला: राहुल गांधी से 105 मिनट की बैठक के बाद कांग्रेस में बने रहने का ऐलान, केरल चुनाव में UDF की कमान संभालेंगे
कांग्रेस नेता शशि थरूर को लेकर लेकर बीते कुछ दिनों से पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज थीं, लेकिन अब इन सभी चर्चाओं पर विराम लग चुका है। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करीब 105 मिनट तक चली अहम बैठक के बाद शशि थरूर ने साफ कर दिया कि वह कांग्रेस में ही हैं और आगे भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
इस बैठक को कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच चल रही कथित असहजता को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था। मीटिंग के बाद थरूर का रुख पहले की तुलना में काफी सकारात्मक नजर आया।
उन्होंने कहा कि बातचीत बेहद रचनात्मक रही और अब सभी एक ही पेज पर हैं, जिससे यह संकेत मिला कि पार्टी के भीतर मतभेद सुलझाने की दिशा में पहल हुई है।
केरल विधानसभा चुनाव में UDF के प्रचार की जिम्मेदारी
शशि थरूर ने कांग्रेस में बने रहने की पुष्टि करते हुए यह भी ऐलान किया कि वह आगामी केरल विधानसभा चुनावों में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा यानी UDF के प्रचार अभियान का नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह कहीं नहीं जा रहे हैं और कांग्रेस के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे। केरल में थरूर की लोकप्रियता और उनकी अंतरराष्ट्रीय छवि को देखते हुए पार्टी के लिए यह घोषणा अहम मानी जा रही है। थरूर ने कहा कि वह केरल के चुनावों में सबसे आगे रहकर पार्टी और गठबंधन के लिए प्रचार करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से न केवल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश गया है, बल्कि विपक्षी दलों को भी यह संकेत मिला है कि कांग्रेस नेतृत्व और शशि थरूर के बीच दूरी की चर्चाएं महज अटकलें थीं।
पार्टी स्टैंड और निजी राय पर थरूर की स्पष्टता
अपनी बेबाक शैली और स्पष्ट विचारों के लिए पहचाने जाने वाले शशि थरूर ने पार्टी लाइन और निजी राय को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर कांग्रेस का आधिकारिक स्टैंड तय होता है, वे उसका विरोध नहीं करते।
थरूर ने दो टूक कहा कि पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ जाने का अधिकार किसी को नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि विकास और नीतिगत मामलों में वे कभी-कभी अपनी निजी राय रखते हैं, जिसे गलत तरीके से पार्टी विरोध के रूप में पेश किया जाता है।
थरूर ने कहा कि वह राजनीति से ज्यादा देश के हित में बोलने को प्राथमिकता देते हैं और 2009 से यही उनका रुख रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्वस्थ लोकतंत्र में विचारों की विविधता जरूरी है, लेकिन पार्टी अनुशासन भी उतना ही अहम है।
कांग्रेस के लिए सियासी संदेश और आगे की राह
शशि थरूर के इस बयान और नेतृत्व से मुलाकात के बाद कांग्रेस को कई स्तरों पर सियासी राहत मिली है। एक ओर जहां पार्टी छोड़ने की अटकलों पर विराम लगा है, वहीं दूसरी ओर केरल जैसे अहम राज्य में कांग्रेस को एक मजबूत और स्वीकार्य चेहरा मिल गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है, जब कांग्रेस संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है। थरूर की भूमिका से पार्टी को न सिर्फ केरल में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, यह बैठक और उसके बाद आए बयान कांग्रेस के भीतर संवाद, संतुलन और सामूहिक नेतृत्व की दिशा में एक अहम संकेत के तौर पर देखे जा रहे हैं।
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