धीरेंद्र शास्त्री: मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध सनातन साधु और बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाल-फिलहाल फिर खबरों के केंद्र में हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार के सांसद पप्पू यादव ने मीडिया में यह कहा की, ‘ये कौन है धीरेंद्र शास्त्री?’ पत्रकारों ने उत्तर में कहा कि कथावाचक हैं।
तब पप्पू यादव ने कहा, ‘चोर-उचक्का को कथावाचक बना रहे हो, ओशो हैं क्या, आचार्य राममूर्ति हैं क्या।
यह सब सांसद ने तब कहा जब पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने धीरेंद्र शास्त्री के-
“तिरंगा में चांद आ जाएगा तो देश सुरक्षित नहीं रहेगा”
वाले बयान पर उनसे सवाल किया। जिसके बाद सांसद भड़क उठे।
वैसे आपको बताया दें की धीरेंद्र शास्त्री एक युवा धार्मिक प्रचारक हैं, जिनका जन्म 4 जुलाई 1996 को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में हुआ। वे बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर हैं और रामचरितमानस, पुराणों का प्रवचन करने और पर्ची खोलकर लोगों समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके अनुयायियों की तादाद देश भर में है और वे अक्सर धार्मिक कार्यों, गुरुकुल शिक्षा, सामाजिक आयोजनों और कन्या विवाह जैसे सामाजिक कार्यक्रमों के लिए चर्चित रहते हैं।
पप्पू यादव ने अपने बयान में यह आरोप लगाया कि शास्त्री के समर्थक उन्हें आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शक के रूप में पेश करते हैं, जबकि वे “ऐसे लोगों को प्रेरित कर रहे हैं जिन्हें समाज में मिश्रित प्रतिष्ठा मिली है”। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान और विवादों के चलते लोगों में भ्रम फैलता है और धर्म का नाम गलत रूप में इस्तेमाल होता है। यादव का आरोप है कि यह सब सनातन परंपरा और उसकी सच्ची शिक्षाओं से हटकर है।
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यह विवाद एक ऐसे समय में उभरा है जब शास्त्री ने अपने बागेश्वर धाम में गुरुकुल स्थापित करने की योजना का ऐलान किया था, ताकि वेदों और परंपरागत शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके। शास्त्री ने कहा था कि वेदों की विद्या जीवन भर टिकती है और इसका प्रचार-प्रसार जरूरी है।
हालांकि पप्पू यादव के आरोपों का दाहिनी ओर से सीधा जवाब नहीं आया है, लेकिन संतों और उनके समर्थकों ने राजनीति की बजाय धर्म के मूल्यों और सामाजिक समानता पर ध्यान देने की बात कही है। उनके समर्थक मानते हैं कि धार्मिक गुरु पर राजनीति का हस्तक्षेप अनुचित है और इससे सामान्य श्रद्धालुओं को भ्रमित किया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद भारतीय धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में धर्म, राजनीति और सामाजिक पहचान के बीच बढ़ती टकराहट का संकेत भी है। जहां एक ओर साधु-संतों का समाज में बड़ा प्रभाव है, वहीं राजनीतिक हस्तक्षेप से उनके धर्मचर्चा को लेकर बहसें और तीखी हो रही हैं।
कुल मिलाकर, पप्पू यादव और धीरेंद्र शास्त्री के बीच यह विवाद केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह धर्म, समाज और राजनीति के बीच के परस्पर प्रभाव और उनकी सीमाओं पर एक नई बहस का रूप लेता दिख रहा है।
पप्पू यादव ने अपने बयान में धीरेंद्र शास्त्री के साथ-साथ वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय पर भी तंज कसा। उन्होंने इंद्रेश उपाध्याय की हालिया शादी का जिक्र करते हुए कहा कि धर्म और अध्यात्म के नाम पर इस तरह का भव्य दिखावा सवाल खड़े करता है।
यादव ने कहा कि जब देश में आम लोग बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब कथावाचकों और बाबाओं की करोड़ों रुपये की शादियां और वीआईपी जमावड़े समाज को गलत संदेश देते हैं।
पप्पू यादव ने यह भी कहा कि भारत की परंपरा सादगी, करुणा और समानता की रही है। उन्होंने कहा कि देश को कृष्ण, गुरु नानक, बुद्ध और आंबेडकर के विचारों के रास्ते पर चलने देना चाहिए, न कि आडंबर और ढोंग की संस्कृति को बढ़ावा देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
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