Bhagwat Retirement Plan

Bhagwat Retirement Plan

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बताया अपना रिटायरमेंट प्लान, भाजपा-संघ के बीच मतभेद पर भी खोले राज

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Bhagwat Retirement Plan: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने अपना रिटायरमेंट प्लान बता दिया है।

गुरुवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में संघ की शताब्दी वर्ष पर चल रही व्याख्यानमाला के समापन अवसर उन्होंने इस मुद्दे पर बात की।

भागवत सवालों के जवाब दे रहे थे तभी उनसे पूछा गया था कि क्या 75 के बाद राजनीति से रिटायर हो जाना चाहिए?

इस दौरान मोहन भागवत ने  स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी रिटायरमेंट की बात नहीं कही।

मैंने यह नहीं कहा कि मैं रिटायर हो जाऊंगा या किसी और को रिटायर हो जाना चाहिए।

मैं 80 की उम्र में भी शाखा लगाऊंगा। हम किसी भी समय रिटायर होने के लिए तैयार हैं।

संघ हमसे जिस भी समय तक काम कराना चाहेगा, हम काम करने के लिए तैयार हैं।

भाजपा और संघ के रिश्ते का सच

मोहन भागवत ने यह भी साफ किया कि भाजपा और संघ के बीच कोई विवाद नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकारों से हमारे रिश्ते हमेशा अच्छे रहे हैं।

मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं हैं।

यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है।

हम केवल सलाह देते हैं, निर्णय सरकार ही लेती है।

यह बयान उस समय आया है जब हाल के महीनों में भाजपा और संघ के बीच रिश्तों पर सवाल उठाए जा रहे थे।

भागवत ने इन अटकलों पर भी विराम लगाया।

इन मुद्दे पर भी बोले RSS प्रमुख

1. अन्य राजनीतिक दलों से संबंध

भागवत ने कहा कि जब पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी संघ के मंच पर आए थे, तो उनकी कई गलतफहमियां दूर हुईं। उन्होंने संकेत दिया कि अन्य राजनीतिक दलों के मन भी समय के साथ बदल सकते हैं।

2. हिंदू-मुस्लिम एकता

भागवत ने कहा, हिंदू-मुस्लिम अलग नहीं हैं। ये पहले से एक हैं, बस पूजा के तरीके अलग हैं। लेकिन झगड़े और डर ने इन्हें अलग-अलग कर दिया है।

3. जनसंख्या और डेमोग्राफी

उन्होंने कहा कि जनसंख्या का संतुलन बिगड़ने से देश का बंटवारा भी हो सकता है। धर्म बदलना व्यक्ति की चॉइस है, लेकिन लोभ और लालच से धर्म परिवर्तन नहीं होना चाहिए।

4. घुसपैठ पर चिंता

भागवत ने कहा कि DNA एक होने का मतलब यह नहीं कि कोई नियम-कानून तोड़कर आए। घुसपैठ रोकना जरूरी है और सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

5. नाम बदलने की बहस

उन्होंने कहा कि शहरों और रास्तों के नाम जनता की भावना के अनुसार बदलने चाहिए। आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मुस्लिम नाम नहीं होने चाहिए।

6. अखंड भारत की अवधारणा

भागवत ने कहा, अखंड भारत कोई राजनीतिक विचार नहीं है। यह एक सांस्कृतिक भावना है। जब यह आएगी तो सभी सुखी रहेंगे और आपसी संबंध मजबूत होंगे।

7. काशी-मथुरा आंदोलन

उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ आंदोलनों में नहीं जाता, राम मंदिर आंदोलन अपवाद था। काशी और मथुरा का महत्व हिंदू समाज के मानस में है, इसलिए समाज इसे आगे बढ़ाएगा।

8. हथियार और सुरक्षा

भागवत बोले कि संघ शांति की बात करता है, लेकिन आत्मरक्षा के लिए हथियार जरूरी हैं क्योंकि दुनिया के सभी देश शांति का पालन नहीं करते।

9. परिवार और जनसंख्या नीति

उन्होंने सुझाव दिया कि परिवार में तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। जन्म दर गिर रही है, खासकर हिंदुओं में यह गिरावट तेज है।

10. शिक्षा और तकनीक

भागवत ने कहा कि नई शिक्षा नीति में पंचकोशीय शिक्षा का कॉन्सेप्ट जोड़ा गया है। बच्चों को कला, खेल और योग के साथ संस्कृति की शिक्षा मिलनी चाहिए। इंग्लिश सीखना बुरा नहीं, लेकिन हिंदी और संस्कृत का महत्व कम नहीं होना चाहिए।

 

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