UPI Charges

UPI Charges

यूपीआई पर एमडीआर चार्ज से किसे होगा फायदा? जानें पूरा हिसाब

Share Politics Wala News

यूपीआई के बड़े मर्चेंट पेमेंट पर एमडीआर चार्ज की नई व्यवस्था से बैंक और यूपीआई ऐप्स को कितना मिलेगा? 10 हजार रुपये के भुगतान का पूरा गणित जानें।

यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के लिए इससे जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू होने की बात कही गई है।

इसके बाद यूपीआई के जरिए होने वाले बड़े भुगतान से जुड़ी फीस और उसके बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आम ग्राहक के लिए यूपीआई पेमेंट का तरीका पहले की तरह ही रहने की बात कही गई है।

नई व्यवस्था में एमडीआर की पूरी रकम किसी एक कंपनी या बैंक के खाते में नहीं जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फीस का हिस्सा ग्राहक के बैंक, दुकानदार के बैंक, यूपीआई ऐप और स्पॉन्सर बैंक के बीच बांटा जाएगा। यानी यूपीआई के जरिए होने वाले बड़े मर्चेंट भुगतान से बनने वाला राजस्व पूरे इकोसिस्टम में अलग-अलग हिस्सों में जा सकता है।

बंटवारे के हिसाब से कुल एमडीआर का 40 प्रतिशत हिस्सा इश्यूइंग बैंक को मिलेगा। यह वही बैंक होता है जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। वहीं 30 प्रतिशत हिस्सा एक्वायरिंग बैंक के हिस्से में जाएगा, यानी वह बैंक जो मर्चेंट के खाते और भुगतान को संभालता है।

यूपीआई ऐप्स के लिए 20 प्रतिशत हिस्सा तय होने की जानकारी है, जबकि बाकी 10 प्रतिशत स्पॉन्सर बैंक को मिलेगा। स्पॉन्सर बैंक यूपीआई ऐप को तकनीकी और बैंकिंग ढांचा उपलब्ध कराने में भूमिका निभाता है।

इसे 10,000 रुपये के भुगतान से समझें। यदि इस ट्रांजेक्शन पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर लगता है तो कुल शुल्क 40 रुपये बनेगा। इसमें 16 रुपये इश्यूइंग बैंक, 12 रुपये एक्वायरिंग बैंक, 8 रुपये यूपीआई ऐप और 4 रुपये स्पॉन्सर बैंक के हिस्से में जाएंगे। इस तरह 40 रुपये की पूरी फीस अलग-अलग भागीदारों के बीच बांट दी जाएगी।

इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका सीधा शुल्क आम यूपीआई ग्राहक से लेने की व्यवस्था नहीं बताई गई है। यानी ग्राहक को 10,000 रुपये भेजने पर अलग से 40 रुपये नहीं देने होंगे। दूसरी ओर, बड़े भुगतान स्वीकार करने वाले मर्चेंट के लिए यह लागत का हिस्सा बन सकता है।

हर यूपीआई लेन-देन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू होगा, ऐसा भी नहीं है। अलग-अलग सेवाओं और ट्रांजेक्शन की श्रेणी के अनुसार शुल्क अलग रखा गया है। पेट्रोल, रेलवे टिकट, मोबाइल रिचार्ज और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे कुछ भुगतान के लिए 5 रुपये का फ्लैट चार्ज बताया गया है। वहीं कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन के लिए 0.02 प्रतिशत एमडीआर की दर बताई गई है।

यूपीआई लंबे समय से जीरो एमडीआर मॉडल पर चल रहा है। नई व्यवस्था के पीछे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने और इसके बुनियादी ढांचे की लागत को संभालने की जरूरत को प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल पेमेंट नेटवर्क, सर्वर क्षमता और साइबर सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने में किया जा सकता है। ऐसे में नई एमडीआर व्यवस्था का असर मुख्य रूप से बड़े मर्चेंट पेमेंट और यूपीआई इकोसिस्टम के राजस्व मॉडल पर दिखाई देगा

यह भी पढ़ें:

मोबाइल EMI नहीं चुकाई तो युवक को बनाया बंधक, निकाला खून

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *