अमेरिका ने 30 दिन के लिए, भारत को दी रूस से तेल खरीदने की छूट, अरविन्द केजरीवाल ने कर दी प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग

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अमेरिका ने 30 दिन के लिए, भारत को दी रूस से तेल खरीदने की छूट, अरविन्द केजरीवाल ने कर दी प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफे की मांग की.  उन्होंने रूस से तेल खरीदने के लिए भारतीय रिफाइनरियों को अमेरिका द्वारा दी गई छूट के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि भारत जैसे बड़े देश को किसी अन्य देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.

अमेरिका कौन होता है भारत को अनुमति देने वाला

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने सवाल उठाया कि आखिर अमेरिका कौन होता है भारत को यह अनुमति देने वाला कि वह रूस से तेल खरीद सकता है या नहीं.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में देशवासियों ने बार-बार यह देखा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकते नजर आए और उन्होंने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात भी नहीं रखी.

केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि “अमेरिका कौन होता है भारत को रूस से तेल खरीदने की अनुमति देने वाला? भारत को अमेरिका से अनुमति लेने की जरूरत ही क्यों है? पिछले कुछ महीनों में देशवासियों ने बड़े दुख के साथ देखा है कि हर कदम पर आप ट्रंप के सामने झुकते रहे और उनके सामने खुलकर बोलने का साहस भी नहीं दिखाया। मोदी जी, आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी है कि आप ट्रंप के सामने झुक रहे हैं?”

पहले कभी भारत ने इस तरह अपना सिर नहीं झुकाया

उन्होंने आगे कहा कि भारत हजारों वर्षों की सभ्यता वाला देश है और यहां 1.4 अरब से अधिक लोग रहते हैं। यह एक महान राष्ट्र है जिसने इतिहास में कई साहसी नेता और योद्धा पैदा किए हैं. केजरीवाल ने दावा किया कि भारत ने पहले कभी किसी देश के सामने इस तरह सिर नहीं झुकाया और भारतीय नेतृत्व इतना कमजोर पहले कभी नहीं दिखा.

अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि यदि वास्तव में ऐसी कोई मजबूरी है जिसका फायदा ट्रंप उठा रहे हैं, तो देश और राष्ट्रीय हितों के लिए प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन भारत की प्रतिष्ठा को इस तरह झुकने नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देश के लोग काफी आहत महसूस कर रहे हैं

दरअसल, यह विवाद उस समय सामने आया है जब अमेरिका के ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने घोषणा की कि भारतीय रिफाइनरियों को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी जा रही है. उन्होंने कहा कि यह फैसला वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है. उनके अनुसार यह छूट सीमित समय के लिए है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि यह केवल उन तेल सौदों को अनुमति देती है जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं.

वैश्विक तनाव के बीच अमेरिका का यह बयान 

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अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि भारत भविष्य में अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता को देखते हुए उठाया गया है.

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हो गई थी. इसके बाद पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है. इसमें से बड़ी मात्रा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है. ऐसे में क्षेत्र में किसी भी तरह का संघर्ष वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है.

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