सुनेत्रा पवार बनीं महाराष्ट्र की पहली महिला: उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के चौथे दिन संभाली सत्ता की जिम्मेदारी
लोकभवन में 12 मिनट का शपथ समारोह, शरद पवार रहे अनुपस्थित
अजित पवार के निधन के चौथे दिन महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार शाम राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
मुंबई स्थित लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह करीब 12 मिनट तक चला। महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मौजूद रहे, लेकिन राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार इसमें शामिल नहीं हुए, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं।
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विधायक दल की बैठक के बाद बनीं नेता, राज्यसभा से दिया इस्तीफा
शपथ ग्रहण से पहले दिन में एनसीपी के विधायक दल और विधान परिषद सदस्यों की विधान भवन में बैठक हुई, जिसमें सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से पार्टी नेता चुना गया।
इसके बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। संविधान के अनुच्छेद 190(1) के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ केंद्र की संसद और राज्य सरकार में मंत्री नहीं रह सकता, इसलिए यह इस्तीफा आवश्यक था। बैठक में एनसीपी के सभी 41 विधायक और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सुनेत्रा विधान भवन पहुंचीं और उन्होंने अपने दिवंगत पति अजित पवार की तस्वीर पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शाम को लोक भवन पहुंचकर उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस दौरान प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल सहित कई वरिष्ठ नेता भी समारोह में शामिल हुए।
पीएम मोदी की बधाई, राजनीतिक संकेत और आगे की चुनौतियां
शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुनेत्रा पवार को बधाई दी। पीएम ने लिखा कि सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनी हैं और उन्हें विश्वास है कि वे राज्य के लोगों की भलाई के लिए काम करेंगी तथा स्वर्गीय अजित पवार के विजन को आगे बढ़ाएंगी।
राजनीतिक दृष्टि से यह शपथ ग्रहण कई मायनों में अहम माना जा रहा है। अजित पवार की असमय मृत्यु के बाद खाली हुए उपमुख्यमंत्री पद को तेजी से भरना महायुति सरकार और एनसीपी दोनों के लिए जरूरी था। वहीं शरद पवार की गैर-मौजूदगी को एनसीपी के अंदरूनी समीकरणों और भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
संविधान के अनुसार सुनेत्रा पवार को अब छह महीने के भीतर महाराष्ट्र विधानसभा का सदस्य बनना होगा या विधान परिषद में निर्वाचित होना पड़ेगा, अन्यथा उनका मंत्री पद स्वतः समाप्त हो जाएगा। ऐसे में आने वाले महीनों में उनके चुनावी कदम और पार्टी की रणनीति पर सभी की नजरें रहेंगी।
सवाल पॉलिटिक्स-वाला
कुल मिलाकर, अजित पवार के निधन के बाद सत्ता और जिम्मेदारी का यह तेज हस्तांतरण न सिर्फ महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि एनसीपी और महायुति सरकार के भविष्य के संकेत भी देता है।
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