SIR Voter List Revision: चुनाव आयोग ने देश में मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और त्रुटि रहित बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
देशभर में मतदाता सूची (Voter List) को अपडेट करने की प्रक्रिया अब दूसरे चरण में प्रवेश कर रही है।
बिहार में सफलतापूर्वक लागू होने के बाद अब EC ने 12 और राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दूसरे चरण की घोषणा कर दी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में यह प्रक्रिया लागू होगी, वहां की वर्तमान मतदाता सूची आज रात से फ्रीज कर दी जाएगी।
(Special Intensive Revision – SIR) का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना, नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत व स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और गलतियों को सुधारना है।
28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर यह पूरी प्रक्रिया 103 दिनों तक चलेगी और अंत में 7 फरवरी 2026 को फाइनल मतदाता सूची जारी की जाएगी।
किन राज्यों में होगा SIR का दूसरा चरण?
SIR 2.0 इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा:
| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | विधानसभा चुनाव वर्ष |
|---|---|
| पश्चिम बंगाल | 2026 |
| केरल | 2026 |
| तमिलनाडु | 2026 |
| पुडुचेरी | 2026 |
| गोवा | 2027 |
| गुजरात | 2027 |
| उत्तर प्रदेश | 2027 |
| छत्तीसगढ़ | 2028 |
| मध्य प्रदेश | 2028 |
| राजस्थान | 2028 |
| अंडमान-निकोबार | विधानसभा नहीं |
| लक्षद्वीप | विधानसभा नहीं |
बिहार के बाद अब इन राज्यों में लगभग 51 करोड़ मतदाताओं की वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण किया जाएगा।
पूरा शेड्यूल: 103 दिन चलेगा अभियान
| चरण | तारीख | प्रक्रिया |
|---|---|---|
| प्रिंटिंग व प्रशिक्षण | 28 अक्टूबर – 3 नवंबर 2025 | BLO और अधिकारियों को प्रशिक्षण |
| घर-घर गणना (Enumeration) | 4 नवंबर – 4 दिसंबर 2025 | मतदाताओं से फॉर्म भरवाना |
| ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी | 9 दिसंबर 2025 | प्रारंभिक सूची सार्वजनिक |
| दावे और आपत्तियां | 9 दिसंबर 2025 – 8 जनवरी 2026 | सुधार और नए नाम जोड़ना |
| सुनवाई और सत्यापन | 9 दिसंबर 2025 – 31 जनवरी 2026 | आपत्तियों की जांच |
| फाइनल वोटर लिस्ट जारी | 7 फरवरी 2026 | अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित |
कौन-कौन से दस्तावेज़ मान्य होंगे?
मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए निम्न दस्तावेज़ मान्य होंगे:
- पेंशनर पहचान पत्र
- सरकारी विभाग द्वारा जारी ID
- जन्म प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट / आधार कार्ड
- 10वीं/12वीं मार्कशीट
- स्थायी निवास प्रमाणपत्र
- वन अधिकार / जाति प्रमाणपत्र
- NRC / परिवार रजिस्टर में नाम
- जमीन/मकान आवंटन पत्र आदि
अगर मतदाता का नाम 2003 की वोटर लिस्ट से मेल खाता है, तो कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ देने की जरूरत नहीं होगी।
असम में क्यों नहीं होगा SIR?
हालांकि, असम में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं, लेकिन फिर भी SIR वहां लागू नहीं किया गया है।
चुनाव आयोग का कहना है कि असम में नागरिकता कानून (NRC एवं CAA से जुड़े नियम) अलग हैं, इसलिए वहां SIR की प्रक्रिया अलग तरीके से चलाई जाएगी।
वहीं, पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर गतिरोध की खबरों पर उन्होंने कहा कि वहां कोई विवाद नहीं है और चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायित्व के तहत काम कर रहा है।
SIR क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
SIR यानी Special Intensive Revision वह प्रक्रिया है जिसके जरिए चुनाव आयोग मतदाता सूची को घर-घर सत्यापन के साथ अपडेट करता है। इसमें:
- 18 साल से ऊपर के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है
- जिस व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी है उसका नाम हटाया जाता है
- दूसरे शहर में जा चुके मतदाताओं के नए पते के अनुसार नाम अपडेट होता है
- मतदाता सूची में नाम और पते में हुई गलतियों को ठीक किया जाता है
BLO (Booth Level Officer) स्वयं घर-घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं और विवरण को मतदाता सूची से मैच करवाते हैं।
आयोग के अनुसार 1951 से 2004 के बीच 8 बार यह पुनरीक्षण हो चुका है, लेकिन पिछले 21 वर्षों में नहीं, इसलिए सूची में डुप्लीकेशन, गलत डेटा और माइग्रेशन के कारण भारी अंतर दिखाई दे रहा है।
कैसे होगा SIR का काम और कौन करेगा?
- हर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर वोटर लिस्ट की जानकारी अपडेट करेंगे।
- प्रत्येक BLO कम से कम तीन बार हर घर जाएगा, ताकि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए।
- मतदाता अपने क्षेत्र से बाहर हैं तो वे ऑनलाइन फॉर्म भी भर सकेंगे।
- इस प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त दस्तावेज या फॉर्म की जरूरत नहीं होगी, अगर पुराने रिकॉर्ड से मिलान हो जाता है।
- 12 राज्यों में SIR के लिए 5.33 लाख BLOs और 7 लाख से अधिक BLAs (राजनीतिक दलों के एजेंट) तैनात होंगे।
- हर विधानसभा क्षेत्र में एक ERO (Electoral Registration Officer) रहेगा, जो SDM स्तर का अधिकारी होगा।
- आयोग ने यह भी तय किया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक वोटर नहीं होंगे, ताकि व्यवस्था सुलभ बनी रहे।
मतदान केंद्रों में बड़ा बदलाव
आयोग ने तय किया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे, ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू रहे, लाइन कम लगे, बुजुर्गों एवं दिव्यांगों को सुविधा मिले।
इसके लिए जरूरत पड़ने पर नए मतदान केंद्र भी बनाए जाएंगे। SIR 2.0 एक राष्ट्रीय स्तर का सबसे बड़ा मतदाता सत्यापन अभियान है, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करना है।
इससे न केवल फर्जी या दोहरी वोटिंग रोकी जा सकेगी, बल्कि पहली बार वोट देने वाले युवाओं, प्रवासी मजदूरों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को भी वोटिंग के अधिकार में शामिल होने का पूरा अवसर मिलेगा।
7 फरवरी 2026 को जारी होने वाली अपडेटेड मतदाता सूची आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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