बांग्लादेश में सत्ता की वापसी: BNP को प्रचंड जनादेश, जमात और छात्र दल को बड़ा झटका

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बांग्लादेश में सत्ता की वापसी: BNP को प्रचंड जनादेश, जमात और छात्र दल को बड़ा झटका

स्पष्ट बहुमत के साथ BNP की वापसी

बांग्लादेश के आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 299 में से 209 सीटें हासिल कीं और पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की।

सरकार बनाने के लिए आवश्यक 150 सीटों के आंकड़े को पार्टी ने आसानी से पार कर लिया। इसके साथ ही यह लगभग तय हो गया है कि पार्टी प्रमुख तारिक रहमान देश के अगले प्रधानमंत्री बनेंगे।

दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को करीब 70 सीटों पर संतोष करना पड़ा, जबकि छात्र आंदोलन से निकली नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) महज चार सीटें जीत सकी।

चुनाव नतीजों ने देश की राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है।

तारिक रहमान की वापसी बनी निर्णायक फैक्टर

करीब 17 साल तक निर्वासन में रहने के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से लौटे तारिक रहमान ने चुनाव से ठीक पहले पार्टी की कमान संभाली।

वे पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं। खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी नेतृत्व पूरी तरह उनके हाथ में आ गया।

देश वापसी पर उनका भव्य स्वागत हुआ और उन्होंने देश भर में रैलियां कर आर्थिक सुधार, प्रशासनिक बदलाव और राजनीतिक स्थिरता को मुख्य मुद्दा बनाया।

विश्लेषकों का मानना है कि उनकी वापसी ने कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरी और मतदाताओं को एक स्पष्ट नेतृत्व विकल्प दिया।

अवामी लीग की अनुपस्थिति और वोटों का ध्रुवीकरण

इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने हिस्सा नहीं लिया, जिससे चुनावी गणित पूरी तरह बदल गया।

अवामी लीग के पारंपरिक वोट बैंक, विशेषकर अल्पसंख्यक हिंदू मतदाताओं का बड़ा हिस्सा BNP की ओर झुक गया। गोपालगंज, खुलना, सिलहट, चटगांव और ठाकुरगंज जैसे क्षेत्रों में BNP ने एकतरफा जीत दर्ज की।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अवामी लीग के मैदान में न होने से विपक्षी वोटों का बंटवारा नहीं हुआ और इसका सीधा लाभ BNP को मिला।

जमात-ए-इस्लामी की छवि बनी हार का कारण

जमात-ए-इस्लामी इस बार दस दलों के गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरी थी, जिसमें NCP भी शामिल थी। इसके बावजूद पार्टी अपेक्षित समर्थन जुटाने में असफल रही।

मुक्ति संग्राम के दौरान उसकी भूमिका को लेकर पुराने आरोप और कट्टरपंथी छवि उसके खिलाफ गई।

चुनाव के अंतिम दिनों में कथित रूप से धन वितरण और बैलेट पेपर में गड़बड़ी की खबरों ने भी उसकी छवि को नुकसान पहुंचाया।

पार्टी ने शरिया कानून लागू न करने जैसे नरम संकेत दिए, लेकिन इससे उसका पारंपरिक समर्थन आधार भी असहज हुआ।

छात्र दल NCP को सीमित सफलता

अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के बाद उभरी NCP से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी और अनुभव की कमी उसके लिए बाधा बनी।

पार्टी 30 सीटों पर चुनाव लड़ी और केवल चार सीटें जीत सकी। हालांकि, उसके प्रमुख नेता नाहिद इस्लाम ढाका-11 से चुनाव जीतने में सफल रहे।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, पार्टी के भीतर मतभेद, बूथ स्तर पर कैडर की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीमित पहुंच ने उसके प्रदर्शन को प्रभावित किया।

नेशनल गवर्नमेंट की संभावना खत्म

चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी ने सर्वदलीय राष्ट्रीय सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन BNP ने इसे ठुकरा दिया। स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद BNP को किसी गठबंधन की आवश्यकता नहीं है

अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस के साथ संबंधों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, परंतु मौजूदा जनादेश BNP को स्वतंत्र रूप से शासन चलाने का अवसर देता है।

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जमात ने खुद को विपक्ष की भूमिका में रखने के संकेत दिए हैं। चुनाव परिणामों ने बांग्लादेश की राजनीति में नए शक्ति संतुलन की तस्वीर स्पष्ट कर दी है।

 

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