बंगाल चुनाव से पहले अफसरों के तबादले पर पर प्रश्नचिन्ह? ममता ने जताया विरोध!

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बंगाल चुनाव से पहले अफसरों के तबादले पर पर प्रश्नचिन्ह? ममता ने जताया विरोध!

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। चुनाव आयोग द्वारा राज्य के कई वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अचानक तबादले किए जाने के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों के भीतर यह कदम उठाया, जिसे लेकर राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

टीएमसी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बताते हुए संसद से लेकर सड़कों तक विरोध करने की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर खुलकर नाराजगी जताई है और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित फैसला बताया है।

चुनाव आयोग के फैसले से बढ़ा विवाद

विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने राज्य के कई शीर्ष अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। चुनाव आयोग ने यह आदेश आधी रात के आसपास जारी किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अचानक हलचल मच गई।

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों का तबादला चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में अनावश्यक हस्तक्षेप जैसा है। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने इसे चुनाव की निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया जरूरी कदम बताया है।

संसद में टीएमसी का विरोध

चुनाव आयोग के इस फैसले का असर संसद में भी दिखाई दिया। राज्यसभा में टीएमसी सांसदों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल खड़े किए। टीएमसी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद राज्य के शीर्ष अधिकारियों को हटाने का फैसला असामान्य है।

उन्होंने सदन में कहा कि आधी रात को मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों को हटा दिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चुनाव आयोग के पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन इस तरह का अचानक कदम कई सवाल खड़े करता है। विरोध के तौर पर टीएमसी सांसदों ने पूरे दिन के लिए राज्यसभा से वॉकआउट भी किया है।

ममता बनर्जी का सड़क पर उतरने का ऐलान

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में दखल बताते हुए विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। ममता बनर्जी ने कहा कि इस फैसले से चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएं। टीएमसी का मानना है कि इस तरह के फैसले राज्य की जनता के जनादेश को प्रभावित करने की कोशिश हो सकते हैं। इसी वजह से पार्टी ने सड़कों पर उतरकर विरोध करने का फैसला किया है।

किन अफसरों को हटाया गया

चुनाव आयोग द्वारा किए गए प्रशासनिक बदलावों में कई बड़े नाम शामिल हैं। मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव से जुड़े सभी कामों से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह 1993 बैच के आईएएस अधिकारी दुष्यंत नरियाल को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है।

गृह विभाग में भी बदलाव किया गया है। जगदीश प्रसाद मीना को हटाकर 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह विभाग का नया प्रमुख बनाया गया है। इसके अलावा राज्य के पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे को हटाकर सिद्धनाथ गुप्ता को डीजीपी बनाया गया है। कोलकाता पुलिस कमिश्नर सुप्रतीम सरकार की जगह अजय कुमार नंद को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन सभी बदलावों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

चुनाव आयोग का क्या कहना है

चुनाव आयोग ने इन तबादलों को लेकर स्पष्ट किया है कि यह फैसला चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराना आयोग की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों में कुछ बदलाव किए गए हैं।

आयोग का कहना है कि इन अधिकारियों की नियुक्ति चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए की गई है। वहीं बीजेपी नेताओं का भी कहना है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर इस तरह सार्वजनिक रूप से सवाल उठाना उचित नहीं है।

इस बीच टीएमसी लगातार चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि राज्य में चल रहे विशेष गहन संशोधन अभियान यानी एसआईआर के जरिए मतदाता सूची को लेकर भी विवाद पैदा किया जा रहा है। ममता बनर्जी का कहना है कि इससे बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम कट सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है

कुल मिलाकर चुनाव की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और तेज हो गया है। एक तरफ सत्ताधारी टीएमसी इस फैसले को राजनीतिक साजिश बता रही है, वहीं विपक्ष और चुनाव आयोग इसे निष्पक्ष चुनाव की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद राज्य की चुनावी राजनीति को और गरमा सकता है।

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