भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के पीछे 1.20 करोड़ रुपये में प्राइवेट पार्ट बेचने का दावा सामने आया। जानिए वायरल रील, पुलिस जांच और पूरे मामले का सच।
हार्ट, लिवर और किडनी की तस्करी की खबरें तो आपने सुनी होंगी, लेकिन क्या आपने कभी प्राइवेट पार्ट और अंडकोष की तस्करी के बारे में सुना है? भोपाल में 17 वर्षीय किशोर की हत्या के बाद ऐसा ही चौंकाने वाला दावा सामने आया। लेकिन इस दावे की असली सच्चाई क्या है और इसके पीछे सोशल मीडिया की कौन-सी फर्जी कहानी है? आइए जानते हैं।
खबर राजनीति की नहीं है, लेकिन आपसे और आपके बच्चों से जुड़ी है, इसलिए इसे समझना जरूरी है।
दरअसल, भोपाल के रानी कमलापति ब्रिज के पास एक लाश तैरती हुई दिखाई दी। लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने शव को बाहर निकाला। शव करीब 5 से 6 दिन पुराना बताया गया और मृतक की उम्र लगभग 17 साल थी।
पुलिस ने आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों की जांच शुरू की। इसी दौरान 6 अगस्त से लापता रेहान का नाम सामने आया। उसकी मां ने पहले शव की पहचान नहीं की, लेकिन चप्पल देखकर उन्होंने बेटे की पहचान कर ली।
इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के मुताबिक, 1 करोड़ 20 लाख रुपये कमाने के लालच में तीन नाबालिगों समेत पांच आरोपियों ने पहले 17 वर्षीय रेहान से दोस्ती की और फिर उसे बहाने से सुनसान जगह ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस ने मुख्य आरोपी जोहेब खान, आमिर कुरैशी और तीन नाबालिग आरोपियों को पकड़ा है। पुलिस के अनुसार, जोहेब खुद को डॉक्टर बताता था।
मृतक इकबाल मैदान और मोती मस्जिद क्षेत्र में पेन और चाबी के छल्ले बेचता था, जबकि उसकी मां मजदूर नगर स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स में सफाई का काम करती हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब एक महीने पहले रेहान से दोस्ती की थी। 6 अगस्त को दो नाबालिग इकबाल मैदान पहुंचे और रेहान को बताया कि खट्टलापुरा के पास कुछ लड़कों से उनका विवाद हुआ है। उन्होंने साथ चलने के बदले उसे 100 रुपये देने की बात कही।
रेहान उनके साथ चल पड़ा। रास्ते में एक और नाबालिग उनके साथ जुड़ गया। चारों उसे गिन्नौरी और किलोल पार्क होते हुए छोटे तालाब के धोबीघाट की ओर ले गए। इस दौरान जोहेब मोबाइल फोन के जरिए उनके संपर्क में था।
पुलिस के मुताबिक, सुनसान जगह पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेहान पर हमला कर दिया और चाकू से वार किए। उसकी मौत के बाद आरोपियों ने जोहेब को वीडियो कॉल किया, जिस पर उसने आगे के निर्देश दिए।
पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि जोहेब ने अपने साथियों को एक वीडियो दिखाया था और 15 से 16 साल के लड़के के प्राइवेट पार्ट के बदले 1 करोड़ 20 लाख रुपये मिलने का लालच दिया था।
श्यामला हिल्स पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल चाकू और मृतक का मोबाइल फोन बरामद किया है। मोबाइल की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या से पहले रेहान की किन लोगों से बातचीत हुई थी। आरोपियों के मोबाइल फोन और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मामले में आरोपियों की संख्या 13 तक हो सकती है, जिनमें दो लड़कियां भी शामिल होने की बात सामने आई है।
अब सवाल यह है कि विदेश में प्राइवेट पार्ट या अंडकोष बेचने की बात आई कहां से?
इसका कनेक्शन सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी दावे से जुड़ा बताया जा रहा है। ऐसी रील्स सोशल मीडिया पर लंबे समय से वायरल होती रही हैं, जिनमें इंसानी अंडकोष की कीमत करोड़ों रुपये बताई जाती है।
बताया जाता है कि इस दावे की जड़ अमेरिका के पेनसिल्वेनिया के एक पुराने मेडिकल-मैलप्रैक्टिस मामले से जुड़ी है। वहां एक मरीज के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने कथित तौर पर गलत अंडकोष निकाल दिया था। बाद में अदालत में उसे मुआवजा मिला। लेकिन सोशल मीडिया पर इसी मुआवजे की रकम को अंडकोष की कीमत बताकर पेश किया जाने लगा।
यही फर्जी दावा आगे चलकर सोशल मीडिया रील्स में करोड़ों रुपये के अंडकोष बेचने की कहानी बन गया। भोपाल पुलिस की जांच में भी आरोपियों के इस तरह के ऑनलाइन दावे से प्रभावित होने की बात सामने आई है।
यानी करोड़ों रुपये में प्राइवेट पार्ट बेचने का दावा और उसके आधार पर किसी इंसान की हत्या करना, एक बेहद खतरनाक सोशल मीडिया भ्रम का नतीजा बन सकता है।
भारत में मानव अंगों और ऊतकों की अवैध खरीद-फरोख्त कानूनन अपराध है। Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994 मानव अंगों और ऊतकों के व्यावसायिक लेन-देन पर रोक लगाता है और अवैध गतिविधियों के लिए सजा का प्रावधान करता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर रील को सच मानना खतरनाक हो सकता है। अगर आपके परिवार, दोस्तों या रिश्तेदारों में कोई ऐसी फर्जी जानकारी के झांसे में आ रहा है और जल्दी अमीर बनने का सपना देख रहा है, तो उसे यह जरूर बताइए कि सोशल मीडिया पर वायरल हर दावा सच नहीं होता।
