आतंकवादियों से लड़ते हुए मई 2022 में मारे गए विशेष पुलिस अधिकारी मुदासिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर भी निर्वासित किए जा रहे लोगों में शामिल हैं। मुदासिर जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक टीम का हिस्सा थे, जिसने विदेशी आतंकवादियों के एक समूह को रोका था।
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Pahalgam terror attack-आतंकवादियों से लड़ते हुए मई 2022 में मारे गए विशेष पुलिस अधिकारी मुदासिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर भी निर्वासित किए जा रहे लोगों में शामिल हैं। मुदासिर जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक टीम का हिस्सा थे, जिसने विदेशी आतंकवादियों के एक समूह को रोका था।
राजनीति में किये गए फैसलों का आधार वक़्त के साथ बदलता रहता है। कभी -कभी व्यक्तिगत प्रयास और कुर्बानियों का बड़ा हासिल होता है तो कभी इन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। पहलगाम आतंकवाद हमला वो एक घटना है जिसने कई फैसले चुटकियों में कर डाले। ऐस ही एक फैसला है पूरे देश से पाकिस्तानियों को भारत से बेदखल करने का। देश भर में ये प्रक्रिया शुरू भी हो गयी है।
Kashmir से पाकिस्तान वापस भेजे जाने वालों में शौर्य चक्र से सम्मानित शहीद Mudasir Ahmed Sheikh की माँ भी
मुदासीर के चाचा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री अमित शाह से दरख्वास्त कि है कि मेरी भाभी को पाकिस्तान नहीं भेजा जाये।
जम्मू- कश्मीर से जायेंगे 60पाकिस्तानी वापस
जम्मू-कश्मीर में अधिकारियों ने 60 पाकिस्तानियों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनमें से एक आतंकी हमले में मारे गए पुलिसकर्मी की मां भी हैं। अधिकारियों ने बताया कि इन सभी को विभिन्न जिलों से इकट्ठा करके बसों में पंजाब ले जाया गया, जहां उन्हें वाघा सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा। निर्वासित किए जा रहे लोगों में अधिकतर पूर्व आतंकवादियों की पत्नियां और बच्चे हैं, जो पूर्व आतंकवादियों के लिए 2010 की पुनर्वास नीति के तहत घाटी में लौटे थे। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 36 पाकिस्तानी श्रीनगर में, नौ-नौ बारामूला और कुपवाड़ा में, चार बडगाम में और दो शोपियां जिले में रह रहे थे।
बिंदास के नाम से मशहूर थे मुदासीर
हम आपको बता दें कि आतंकवादियों से लड़ते हुए मई 2022 में मारे गए विशेष पुलिस अधिकारी मुदासिर अहमद शेख की मां शमीमा अख्तर भी निर्वासित किए जा रहे लोगों में शामिल हैं। मुदासिर जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक टीम का हिस्सा थे, जिसने विदेशी आतंकवादियों के एक समूह को रोका था। जम्मू-कश्मीर पुलिस के जांबाज मुदस्सिर अहमद शेख को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जम्मू-कश्मीर में तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों को मार गिराने के लिए मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित भी किया गया था।
उनकी गर्दन और कंधे पर गोली लगी थी लेकिन उन्होंने आतंकवादियों को नहीं छोड़ा था। मुदासिर ने दूसरे हाथ से AK-47 से फायरिंग जारी रखी थी। हर कोई उन्हें बिंदास कहता था क्योंकि वे निडर थे और उनका मानना था कि “आपको हर दिन शेर की तरह जीना चाहिए”। उनकी शहादत के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने उनके घर का दौरा कर परिजनों से मुलाकात की थी और उन्हें ढाढस बंधाया था।
मुदासीर के चाचा ने कहा ऐसा न करें
इस घटनाक्रम से खुश नहीं दिख रहे मुदासिर के चाचा मोहम्मद यूनुस ने कहा, ‘‘मेरी भाभी पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से हैं, जो हमारा क्षेत्र है। केवल पाकिस्तानियों को ही निर्वासित किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि मुदासिर की मृत्यु के बाद, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने परिवार से मुलाकात की थी और उपराज्यपाल भी दो बार परिवार से मिलने आए थे। मोहम्मद यूनुस ने कहा, ‘‘मेरी भाभी जब यहां आई थीं, तब उनकी उम्र 20 साल थी और वह 45 साल से यहां रह रही हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से मेरी अपील है कि उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।’’
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