मध्यप्रदेश भाजपा में नरोत्तम मिश्रा को लेकर फिर हलचल तेज है। बड़े नेताओं की लगातार मुलाकातों के बाद उनकी संभावित नई भूमिका को लेकर अटकलें बढ़ गई हैं।
मध्यप्रदेश भाजपा की सियासत में पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दतिया उपचुनाव के बाद पार्टी के भीतर उनकी राजनीतिक भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन अब भाजपा के बड़े नेताओं की लगातार उनसे हो रही मुलाकातों ने नई तस्वीर पेश कर दी है।
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा नेतृत्व के समीकरण बदल रहे हैं।
दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद जिला संगठन को भंग कर दिया गया था। इसके साथ ही नरोत्तम मिश्रा के करीबी माने जाने वाले कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं पर भी कार्रवाई हुई।
इन कदमों को उस समय उनके प्रभाव को सीमित करने की कोशिश के तौर पर देखा गया और सवाल उठने लगे कि क्या पार्टी संगठन अब नरोत्तम मिश्रा से दूरी बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। हालांकि, हालिया घटनाक्रम इन अटकलों से बिल्कुल अलग संकेत देता दिखाई दे रहा है।
दरअसल, पहले क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल नरोत्तम मिश्रा के आवास पहुंचे। इसके बाद वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उनसे मुलाकात की और अगले ही दिन मंत्री विजय शाह भी पूर्व गृहमंत्री से मिलने उनके घर पहुंचे।
भाजपा के संगठन और सरकार से जुड़े प्रमुख चेहरों की लगातार मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि अगर पार्टी में नरोत्तम मिश्रा की भूमिका सीमित करने का फैसला हो चुका था, तो फिर इतने वरिष्ठ नेता लगातार उनसे मिलने क्यों पहुंच रहे हैं?
इन मुलाकातों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि राजनीति में नेताओं के बीच होने वाली हर बैठक को केवल सामान्य शिष्टाचार मान लेना हमेशा आसान नहीं होता। खासकर तब, जब मुलाकात करने वाले नेता संगठन और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हों। हालांकि, इन बैठकों के आधार पर नरोत्तम मिश्रा को किसी नए पद या जिम्मेदारी मिलने की पुष्टि करना अभी जल्दबाजी होगी। भाजपा की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है।
वहीं, ओरछा में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दौरान नरोत्तम मिश्रा को मिली तवज्जो ने भी उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा बढ़ाई थी। अब बड़े नेताओं की मुलाकातों के बाद यह सवाल फिर सामने है कि क्या पार्टी उन्हें किसी अहम भूमिका में वापस लाने पर विचार कर रही है। या फिर इन मुलाकातों के पीछे संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर कोई दूसरा संदेश है?
नरोत्तम मिश्रा लंबे समय तक मध्यप्रदेश भाजपा के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल रहे हैं। सरकार में गृह मंत्री रहते हुए उनकी सक्रियता और संगठन में प्रभाव को लेकर लगातार चर्चा होती रही। ऐसे में दतिया के उपचुनाव के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर उठे सवालों के बीच भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की आवाजाही निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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