वक्फ बिल पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी ) की रिपोर्ट राज्य सभा में गुरुवार को पेश की गयी। राज्यसभा में बीजेपी सांसद मेधा कुलकर्णी ने वक्फ बिल पर जेपीसी रिपोर्ट पेश की। बिल के पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी दलों ने नारेबाजी की और सरकार पर वक्फ बोर्डों को कमजोर करने का आरोप लगाया। बढ़ते हंगामे के चलते सभापति को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।और सदन नहीं चल पाया।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि इस रिपोर्ट में विपक्ष की असहमतियों को डिलीट कर दिया गया है। यह रिपोर्ट फर्जी है। और एक तरह से असंवैधानिक भी। विपक्षी सदस्यों के मुताबिक सरकार एकतरफा तरीके से बिल को आगे बढ़ा रही है। अपनी बात रखने के लिए उन्होंने डिसेंट नोट भी सौंपे हैं। आप संसद संजय सिंग ने कहा हमने किसी विषय पर अपना पक्ष रखा। आप इससे सहमत या असहमत हो सकते हो। उसे कूड़ेदान में कैसे डाल सकते हो।
विपक्ष अपनी असहमति जताते हुए कह रहा है कि यह बिल मुस्लिमों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। इससे वक़्फ़ के कामकाज में दखलंदाज़ी की जा रही है। वहीं भाजपा सांसदों ने कहा वक़्फ़ की सम्पत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लेन के लिए यह बिल लगया गया है। इस बिल को लेकर पहले से ही सोशल मीडिया पर लिखा जा रहा है। कर्नाटक से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने 2 फरवरी को सोशल मीडिया X पर अपना असहमति नोट और फाइनल रिपोर्ट के कुछ पेज शेयर किए थे। उन्होंने लिखा- वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर जेपीसी के सदस्य के रूप में मैंने विधेयक का विरोध करते हुए एक असहमति नोट प्रस्तुत किया था। आश्चर्य की बात यह है कि मेरी जानकारी के बिना ही मेरी असहमति नोट के हिस्से को एडिट किया गया है। उन्होंने लिखा कि जेपीसी पहले ही तमाशा बनकर रह गई थी, लेकिन अब वे और भी नीचे गिर गए हैं।
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