ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर में आएंगे भारत, पीएम मोदी से होगी अहम मुलाकात
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन सितंबर में भारत दौरे पर आ सकते हैं। यह फरवरी में अमेरिका के साथ शुरू हुए संघर्ष के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। ईरानी सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया है कि पेजेशकियन भारत में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे।
भारत में अपने दौरे के दौरान ईरानी राष्ट्रपति BRICS सम्मेलन में भाग लेने के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी कर सकते हैं। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में भारत और ईरान के संबंधों को मजबूत करने, चाबहार बंदरगाह की स्थिति और पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
चाबहार पोर्ट और पश्चिम एशिया पर होगी चर्चा
मसूद पेजेशकियन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित मुलाकात में चाबहार बंदरगाह एक अहम मुद्दा हो सकता है। भारत के लिए चाबहार पोर्ट रणनीतिक और व्यापारिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए भारत मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक अपनी पहुंच को मजबूत करना चाहता है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। भारत लगातार क्षेत्र में शांति, स्थिरता और बातचीत के जरिए समाधान की जरूरत पर जोर देता रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा
भारत की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया जा सकता है। मौजूदा संघर्ष के बीच इस क्षेत्र में कई जहाजों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं और भारतीय नागरिक भी इसकी चपेट में आए हैं।
नई दिल्ली की ओर से दी गई हालिया जानकारी के मुताबिक, इस समय 165 से अधिक भारतीय नाविक होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में काम कर रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
पीएम मोदी ने जून में दिया था भारत आने का न्योता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की थी। इसी दौरान मोदी ने उन्हें 12 और 13 सितंबर को भारत में होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था।
दोनों नेताओं की इससे पहले मुलाकात अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।
हालांकि, अभी तक भारत के विदेश मंत्रालय यानी MEA की ओर से ईरानी राष्ट्रपति के भारत दौरे को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
BRICS में ईरान की भूमिका
ईरान जनवरी 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। उसके साथ मिस्र, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात भी संगठन के पूर्ण सदस्य बने थे।
भारत ने BRICS के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। इनमें रूस और चीन भी शामिल हैं।
पश्चिम एशिया संकट पर मोदी-पेजेशकियन की पहले भी हुई बातचीत
जून में फोन पर हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की थी। यह बातचीत ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों के युद्धविराम समझौते के बाद दोनों नेताओं की पहली बातचीत थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, मोदी ने उस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को भारत और पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया था। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए बातचीत के जरिए स्थायी शांति की उम्मीद भी व्यक्त की थी।
जून में भारत आए थे ईरानी विदेश मंत्री
पेजेशकियन के संभावित भारत दौरे से कुछ महीने पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची जून में भारत आए थे। उन्होंने BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था।
भारत यात्रा के दौरान अराघची ने कहा था कि वैश्विक शांति स्थापित करने में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के प्रयासों में नई दिल्ली बड़ी भूमिका निभा सकता है।
भारतीय नाविकों की मौत पर भारत ने जताया था विरोध
पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर भारत की कड़ी चिंता व्यक्त की थी।
भारत ने ईरान से स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी परिस्थिति में वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
विदेश मंत्रालय की ओर से संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 16 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 10 नाविक शामिल हैं। वहीं 75 अन्य भारतीय घायल हुए हैं।
14 जुलाई को विदेश मंत्रालय ने ईरान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन मोहम्मद जावेद हुसैनी को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया था जिसमें भारतीय नाविकों को ले जा रहे संयुक्त अरब अमीरात के झंडे वाले दो ऊर्जा टैंकर ईरानी क्रूज मिसाइलों की चपेट में आ गए थे। इस घटना में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
मसूद पेजेशकियन का संभावित भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और भारत के ऊर्जा एवं समुद्री हित महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में मोदी-पेजेशकियन मुलाकात पर भारत और ईरान के साथ-साथ पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।
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