राख हो चुकी ज़िंदगी में हमेशा एक चिंगारी ज़िंदा रहती है। बस फूंक मारने से मत चूकिए। दुनिया फिर कहेगी सलाम, कमाल।
पंकज मुकाती (POLITICSWALA)
ज़िंदगी कोई सिगरेट नहीं कि सिर्फ एक बार सुलगेगी। एक बार धुंआ उठा और ख़त्म। ज़िंदगी अवसरों का नाम है। इसके सिरे कभी बुझते नहीं। राख हो चुकी उम्मीदों के ढेर में भी कुछ न कुछ ज़िंदा रह जाता है।
बस एक चिंगारी आपके भीतर जलती रहनी चाहिए। उस चिंगारी में फूंक मारने की देरी है, वो फिर ज्वलंत होगी। पर ये एक फूंक आसान नहीं। ये फूंक मारने के लिए बड़ा ज़िगरा चाहिए।
क्योंकि ये तय है, इस राख के पहले आप रोशन रहे हैं। आपकी प्रतिभा को खूब प्रशंसा मिली होगी। खूब चकाचौंध, लाइमलाइट देखी होगी। उस रुतबे, टैलेंट की तपिश कब एक फैसले से आग बनी आप समझ ही नहीं पाए।
पर राख हो चुकी ज़िंदगी में हमेशा एक चिंगारी ज़िंदा रहती है। बस फूंक मारने से मत चूकिए। दुनिया फिर कहेगी सलाम, कमाल।
इंडियन आइडल के मंच पर एक ऐसी ही चिंगारी पिछली सप्ताह दिखी। राख हो चुकी उम्मीदों से फिर ज़िंदगी की तलाश में एक स्टार आया, इस मंच पर।
इसका नाम है विनीत सिंह। विनीत 15 साल पहले एक टीवी शो में विजेता रहा। खूब नाम कमाया। बंगला, गाडी सब ख़रीदा। फिर कई ऑफर ठुकराए।
सात साल ‘लॉकडाउन’ से रहे। अपने घर में कैद एकांत में। समझ ही नहीं पाए- कहाँ से सिरा पकड़ें। निराश होकर मां से बोले-घर आ रहा हूँ। मुंबई छोड़कर।
मां बोली-आ जाओ, साथ रहेंगे। पर। तुम जब हाथ में माइक लिए होते हो तभी खुश व ज़िंदा दिखते हो। मैं तुम्हे बिना माइक के नहीं देख सकूंगी।
विनीत फिर उठे अपनी ज़िंदगी जीने। इंडियन आइडल के मंच पर आये। जज नेहा कक्कड़ उनकी जूनियर रही है। सोचिये कितना कठिन रहा होगा ये सफर।
जब अपने से जूनियर के सामने प्रतिभागी के तौर पर खड़ा होना। 15 साल पहले के स्टारडम को छोड़कर ,नए लड़कों के साथ मैदान पकड़ना। यही साहस और ज़िंदगी है। विनीत जैसा किस्सा हम सबका होगा। कई लोग स्टारडम से नीचे आकर ‘लॉकडाउन’ हो चुके होंगे।
उन सबको अपने टैलेंट पर भरोसा रखकर उठना होगा। ये भूल जाईये दुनिया क्या कहेगी। आप आगे तो बढ़ो, दुनिया फिर ताली पीटेगी। विनीत को देखिये। वेलडन विनीत।
विनीत का ये वीडियो जरूर देखिये
https://www.youtube.com/watch?v=aDG9ny7rgtU
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