Divya Mittal Resignation

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IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा, राहुल गांधी से मुलाकात के दावे पर सियासी बहस तेज!

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उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की वजह सामने नहीं आई है, लेकिन BJP मीडिया पैनलिस्ट प्रशांत उमराव के एक दावे के बाद मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है।

उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने करीब 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 2013 बैच की अधिकारी दिव्या मित्तल वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

उनके अचानक इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि, दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की कोई स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है, जिसके चलते उनके फैसले को लेकर अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम कर चुकी हैं और देवरिया की जिलाधिकारी के तौर पर भी उनकी पहचान बनी। उनके काम करने के तरीके और प्रशासनिक फैसलों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। अब उनके सेवा से अलग होने के फैसले ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।

इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के मीडिया पैनलिस्ट प्रशांत उमराव की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया। उन्होंने दावा किया कि दिव्या मित्तल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद इस्तीफा दिया।

हालांकि, यह दावा प्रशांत उमराव की ओर से किया गया है और दिव्या मित्तल की ओर से इस्तीफे को लेकर ऐसी कोई वजह नहीं बताई गई है।

प्रशांत उमराव ने अपनी पोस्ट में दिव्या मित्तल की प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर भी कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्या मित्तल की विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान कई जनप्रतिनिधियों के साथ उनके संबंध सहज नहीं रहे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अधिकारी की छवि को लेकर उनके काम के साथ-साथ पीआर को भी काफी महत्व दिया जाता था। इसके अलावा प्रशांत उमराव ने दिव्या मित्तल के पति को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और उनकी कथित गतिविधियों पर सवाल खड़े किए।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी इस दावे की सत्यता के लिए महत्वपूर्ण होगी।

प्रशांत उमराव उत्तर प्रदेश बीजेपी से जुड़े मीडिया पैनलिस्ट होने के साथ सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी करते हैं और सोशल मीडिया पर राजनीतिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहते हैं।

दूसरी ओर, दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए दी, लेकिन इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं किया। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद उन्होंने अचानक इस्तीफा क्यों दिया।

क्या इसके पीछे निजी कारण हैं, करियर से जुड़ा कोई फैसला है या कोई अन्य वजह? इसका जवाब दिव्या मित्तल की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल उनका इस्तीफा और उस पर सामने आए राजनीतिक दावे चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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