मतदान के आंकड़े जारी करने में देरी के कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर चुनाव आयोग ने फटकार लगाते हुए कहा कि वे सोच-समझकर बयान दें। कांग्रेस अध्यक्ष ने वोटर टर्नआउट में हेरफेर का आरोप लगाया था । आयोग ने कहा कि वोटिंग का आंकड़ा के देने में कोई भी देरी नहीं हुई। खड़गे ऐसे आरोप लगाकर लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं । चुनाव के बीच में ऐसे आरोप जनता में उलझन और परेशानी पैदा करते हैं । यहाँ तक कि इस तरह के बयान निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया में परेशानी पैदा हैं।
चुनाव आयोग कहा कि फाइनल वोटिंग डेटा हमेशा वोटिंग के दिन से ज्यादा ही रहता है। 2019 के चुनाव के बाद से हम मैट्रिक्स पर इसे अपडेट कर रहे हैं। हमारे डेटा कलेक्ट करने के तरीके में कोई भी गड़बड़ी नहीं है। आयोग ने कहा कि ऐसे बयानों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका उसके कोर मेनडेट पर सीधा असर पड़ता है। इस तरह के बयान मतदाताओं की भागीदारी पर नकारात्मक प्रभाव डाल राज्यों में बड़ी चुनाव मशीनरी के उत्साह को कम कर सकते हैं।
लैटर लिख कर पूछा था खड़गे ने
कांग्रेस अध्यक्ष ने 7 मई को I.N.D.I.A के दलों के नेताओं को लेटर लिखा था। जिसमें उन्होंने लिखा था कि कितने मतदान बताने में देरी क्यों है? जबकि पहले ये आंकड़े 24 घंटे में सार्वजनिक हो जाते थे ।
खड़गे ने कहा था कि पहले चुनाव आयोग 24 घंटे के अंदर यह बता देता था कि कितना फीसदी मतदान हुआ है, लेकिन इस बार देरी हो रही है, उसकी वजह क्या है? इसे लेकर अभी तक आयोग द्वारा कोई सफाई क्यों नहीं दी गई है। देरी के बाद भी जो डेटा आयोग ने रिलीज किया है उसमें कई अहम जानकारियां नहीं हैं।
खड़गे ने दोनों फेज की फाइनल वोटिंग में 5.5% की बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाया था। खड़गे ने कहा था कि आयोग को बताना चाहिए कि हर पोलिंग स्टेशन पर कितना प्रतिशत मतदान हुआ। उन्होंने सभी सहयोगी दलों से इस तरह की कथित गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की थी।
उन्होंने लिखा कि पहले चरण में 102 सीटों के लिए मतदान हुआ था। आयोग ने कहा 19 अप्रैल को शाम 7 बजे तक अनुमानित मतदान लगभाग 60% था, जबकि इसी तरह दूसरे चरण के लिए अनुमानित मतदान लगभग 60.96% बताया गया था ।
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