Greater Noida Bus Fire

Greater Noida Bus Fire

“मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे” ड्राइवर-कंडक्टर ने नहीं रोकी बस, 9 की मौत

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यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग से 9 यात्रियों की मौत हुई। FIR में जलने की गंध और बस न रोकने के आरोप सामने आए।

ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए स्लीपर बस अग्निकांड ने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही बस में देर रात अचानक आग लग गई।

देखते ही देखते आग ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। पुलिस के मुताबिक, हादसा जेवर थाना क्षेत्र में एक्सप्रेसवे के करीब 33वें किलोमीटर के पास हुआ।

हादसे के बाद दर्ज FIR में एक यात्री की शिकायत के आधार पर घटना से पहले की स्थिति का भी जिक्र किया गया है। शिकायत के मुताबिक, रात करीब साढ़े 11 बजे कुछ यात्रियों को ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने जैसी गंध महसूस हुई।

यात्रियों ने इसकी जानकारी बस के ड्राइवर और कंडक्टर को दी। आरोप है कि उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया और बस को तुरंत रोककर जांच नहीं की गई। FIR में यह भी दावा किया गया है कि ड्राइवर और कंडक्टर केबिन में बीड़ी या सिगरेट पी रहे थे।

कुछ ही समय बाद ड्राइवर की सीट के आसपास आग की लपटें दिखाई देने लगीं। बस में मौजूद यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई।

कई लोगों ने चालक से बस रोकने की मांग की। FIR में आरोप लगाया गया है कि उस समय चालक और परिचालक ने यात्रियों की बात नहीं मानी और कथित तौर पर बेहद आपत्तिजनक जवाब दिया। हालांकि, यह पूरा विवरण शिकायतकर्ता के आरोपों पर आधारित है और मामले की जांच पुलिस कर रही है।

आग तेजी से फैलने के कारण बस के अंदर धुआं भर गया। यात्रियों को बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया। कुछ लोगों ने खिड़कियों से कूदकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ यात्रियों ने शीशे तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की।

मौके पर पहुंचे लोगों ने भी राहत और बचाव कार्य में मदद की। आग बुझाने के लिए बस में रखे अग्निशामक यंत्र का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका।

पुलिस और दमकल की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। अधिकारियों के अनुसार, 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस के मुताबिक, बस के अंदर मिले 9 यात्रियों की मौत आग में झुलसने और दम घुटने से हुई। हादसे के बाद बस पूरी तरह जलकर क्षतिग्रस्त हो गई।

हादसे में बची एक महिला यात्री ने भी उस रात की भयावह स्थिति बताई। उनके मुताबिक, वह बस में सो रही थीं, तभी अचानक शोर सुनाई दिया कि बस में आग लग गई है। यात्री तेजी से बाहर निकलने लगे।

बाहर निकलने की कोशिश में वह बस के अंदर ही गिर गईं और कुछ समय तक फर्श पर पड़ी रहीं। उनके अनुसार, कई लोग जान बचाने की कोशिश में उनके ऊपर से गुजरते हुए बाहर निकले। महिला ने बताया कि उनके पति भी बस से बाहर नहीं निकल सके।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग बस के आगे के हिस्से से फैलनी शुरू हुई थी और कुछ ही समय में यात्रियों वाले हिस्से तक पहुंच गई। धुएं की वजह से अंदर मौजूद लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल हो गया। इसी दौरान यात्रियों और स्थानीय लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़कर अंदर फंसे लोगों को निकालने का प्रयास किया। लेकिन आग की तेजी के कारण सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालना संभव नहीं हो सका।

हादसे के बाद पुलिस ने बस के ड्राइवर और कंडक्टर को हिरासत में लिया है और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। FIR में चालक और परिचालक पर यात्रियों की चेतावनी को नजरअंदाज करने और समय पर बस नहीं रोकने के आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आग की वास्तविक वजह क्या थी और बस में सुरक्षा से जुड़े सभी इंतजाम नियमों के मुताबिक थे या नहीं।

पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, आग बस के एसी से निकली चिंगारी या किसी तकनीकी समस्या के बाद तेजी से फैलने की आशंका जताई गई है। हालांकि, आग लगने की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अलग-अलग रिपोर्टों में बस की तकनीकी स्थिति और उसके संचालन से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, इसलिए जांच में इन पहलुओं को शामिल किया जा रहा है।

इस हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिवारों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री की ओर से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की मदद देने की बात कही गई है।

अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि आग लगने से पहले यात्रियों द्वारा बताई गई जलने की गंध पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्या समय रहते बस रोकने से जानमाल का नुकसान कम किया जा सकता था।

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