मुख्यमंत्री निवास भोपाल में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी 2.0 के वॉल वर्जन का लोकार्पण हुआ। घड़ी में लाखों वर्ष पुरानी और भविष्य की कालगणना के साथ पंचांग व खगोलीय गणनाओं की जानकारी उपलब्ध होगी।
भोपाल| स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी 2.0 के वॉल वर्जन का लोकार्पण किया। श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की ओर से विकसित की गई इस घड़ी को भारतीय कालगणना और आधुनिक तकनीक के संगम के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को वैदिक रिस्ट वॉच भी भेंट की गई, जिसे इसी परियोजना के विस्तार के तौर पर तैयार किया गया है।
नई वैदिक घड़ी की सबसे चर्चित विशेषताओं में इसकी दीर्घकालिक कालगणना क्षमता शामिल है। इसमें करीब 21 लाख वर्ष पहले तक की पंचांगीय गणनाओं का अध्ययन करने के साथ आगामी लगभग 5 लाख वर्षों तक की कालगणना देखने की सुविधा विकसित किए जाने की जानकारी दी गई है।
यानी किसी निर्धारित समय के आधार पर तिथि, पक्ष, नक्षत्र, योग, करण, हिंदू मास और अन्य पंचांगीय विवरणों को देखा जा सकेगा। परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय समय गणना को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।
जन्माष्टमी पर श्रीकृष्णमय मध्यप्रदेश …
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में आयोजित ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का शुभारंभ भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और दीप प्रज्ज्वलित कर किया। @DrMohanYadav51@TrustsReligious @minculturemp… pic.twitter.com/zwTlTzjbAT
— Jansampark MP (@JansamparkMP) September 4, 2026
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी 2.0 में समय की सामान्य जानकारी के साथ पंचांग से जुड़े करीब 19 प्रमुख तत्वों को शामिल किया गया है। इसमें सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्रोदय-चंद्रास्त, तिथि, पक्ष, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया, सूर्य एवं चंद्र राशि, हिंदू मास, मुहूर्त तथा प्रमुख व्रत-त्योहार जैसी जानकारियां देखी जा सकती हैं। वृद्धि तिथि, अधिक मास और क्षय मास जैसी जटिल गणनाओं को भी इसमें शामिल करने की बात कही गई है।
इस घड़ी में खगोलीय गणनाओं को भी स्थान दिया गया है। सूर्य, चंद्रमा और नवग्रहों की स्थिति, राशि एवं नक्षत्र में उनके गोचर तथा ग्रहों की मार्गी और वक्री गति से संबंधित जानकारी भी इसमें प्रदर्शित की जा सकती है। खास बात यह बताई गई है कि इसकी मूल कालगणना प्रणाली को ऑफलाइन उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जिसके चलते हर समय इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।
परियोजना के मुताबिक, विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को और विस्तृत बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भी सुझाव दिया गया था। काशी विश्वनाथ मंदिर में घड़ी के अवलोकन के दौरान प्राचीन काल की गणनाओं को इसमें शामिल करने और इसे अधिक परिष्कृत बनाने की बात सामने आई थी। इसी क्रम में वैदिक घड़ी के नए संस्करण में विस्तृत कालगणना को जोड़ा गया है।

कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी और वैदिक क्लॉक रिस्ट वॉच के अन्वेषणकर्ता मयंक पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को वैदिक रिस्ट वॉच भेंट की। इस घड़ी को स्मार्ट वॉच के स्वरूप में भी विकसित किया गया है, जिसमें स्थान, अक्षांश और देशांतर के आधार पर वैदिक समय तथा पंचांग संबंधी विवरण उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
इसमें ऊर्जा से जुड़ा एक विशेष फीचर भी शामिल किया गया है, जो जन्म तिथि, समय और स्थान जैसी जानकारियों के आधार पर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक और कार्मिक ऊर्जा के दैनिक बदलाव का आकलन प्रस्तुत करने का दावा करता है।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी 2.0 को भारतीय ज्ञान परंपरा, ज्योतिषीय गणित और खगोलीय गणनाओं को आधुनिक डिजिटल एवं वियरेबल तकनीक से जोड़ने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके जरिए प्राचीन भारतीय कालगणना को तकनीक के माध्यम से नए स्वरूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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