बेईमानी का ‘खेल’ – 22000 कीमत की मशीनें 66000 में खरीदी

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ओपन जिम, ओपन घोटाला

बेईमानी का ‘खेल’ – 22000 कीमत की मशीनें 66000 में खरीदी

भोपाल।

बर्बाद-ए-गुलिस्ताँ करने को बस एक ही उल्लू काफी था,
अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा, जब हर शाख़ पे उल्लू बैठा है। 

शौक बहराइची का है ये शेर मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के लिए मुफीद है। खेल विभाग में संयुक्त संचालक हैं बीएस यादव, यादव साहब मेरठ की एक कंपनी पर इतने मेहरबान हैं कि उसे ओपन जिम की मशीनों के लिए तीन गुना कीमत का भुगतान कर रहे हैं।

कंपनी का नाम है खालसा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड..पॉलिटिक्सवाला ये आरोप पूरी जिम्मेदारी से सबूतों के साथ लगा रहा है। आखिर बात जनता की गाढ़ी कमाई की है.. जो भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।

खेल एवं युवा कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक बीएस यादव के हस्ताक्षर से 6 नवंबर 2024 को मेरठ की कंपनी खालसा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को जारी किया गया।

ओपन जिम की आप इन तीन मशीनों की कीमत देखिए…

  1. सबसे पहले लेग प्रेस जिसकी एक यूनिट की कीमत है 65000 रुपये
  2. दूसरी मशीन है एयर स्विंग जिसकी एक यूनिट 55500 की है।
  3. वहीं तीसरी मशीन ट्विस्टर है, जो 55450 रुपये की है।

ये ऑडर 6 नवंबर 2024 को जारी हुए हमने हांडी में से चावल देखने के हिसाब से आपको सिर्फ तीन मशीनों की कीमत सामने हैं। घोटाला तो बहुत बड़ा है। कहानी यही है 2024 के खेल विभाग में जिस मशीन की कीमत 66000 है। एक साल बाद 2025 में नगर निगम को यही कंपनी जब आर्डर सप्लाय करती है तो रेट होता 22000 .खालसा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड 2025 नगर निगम को ओपन जिम के लिए यही मशीनें सप्लाई करती है।

वर्क ऑर्डर जारी किया गया 22 अगस्त 2025 को, इसमें भी वही तीन मशीनें सप्लाई की गई, लेकिन उनकी कीमत भी देख लीजिएसबसे पहले लेग प्रेस, एक यूनिट की कीमत 22881.35 रुपये यानी जो मशीन खेल विभाग को 65000 की दी गई थी यहां 22 हजार की दी गई।

अब दूसरी मशीन है एयर स्विंग जो दी गई 20338.98 रुपये की, यानी जो खेल विभाग को 55500 की दी गई वो नगर निगम को 20 हजार की दी गई।

वहीं तीसरी मशीन ट्विस्टर नगर निगम को दी गई 22033.89 रुपये में, जो खेल विभाग को 55450 रुपये में दी गई थी, वो भी एक साल पहले…

तो अब सवाल उठता है यादव साहब कि खेल विभाग को दी गई मशीनों में क्या सोना चांदी की बनी हुई थीं या फिर उन पर सोना चांदी का अर्क चढ़ा था..

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जो खालसा एक्सपोर्ट्स ने खेल विभाग को तीन गुना कीमत पर दी।

यादव साहब की प्रोफाइल भी जानना जरुरी है। वर्ष 2019 में आर्थिक अपराध शाखा यानी EOW ने उनके खिलाफ एक प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज की थी। यह मामला 2007 से 2011 के बीच करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़ा था, जब वे ‘यूथ वेल्फेयर ऑफिसर’ के रूप में कार्यरत थे।

वर्तमान में बीएस यादव खेल एवं युवा कल्याण संचालनालय, भोपाल में संयुक्त संचालक के रूप में प्रशासनिक और खेल विकास गतिविधियों की देखरेख करते हैं।सोचिए जब यूथ वेल्फेयर ऑफिसर के रूप में काम करते हुए करोड़ों का खेल कर दिया तो अब तो संयुक्त संचालक हैं यादव साहब

पॉलिटिक्सवाला ने आपको सबूतों के साथ जो खबर दिखाई उसको देखकर आप खुद तय कीजिए कि किस तरह जनता के पैसे की बर्बादी की जा रही है। मेरठ की कंपनी खालसा एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड पर यादव साहब इतने मेहरबान क्यों हैं?

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