BJP Indore Executive Committee

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इंदौर BJP कार्यकारिणी पर विवाद: गुंडे की पत्नी बनीं नगर मंत्री, खाती समाज ने सुमित मिश्रा के पोस्टर पर पोती कालिख

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BJP Indore Executive Committee: इंदौर भाजपा की नई नगर कार्यकारिणी की घोषणा के बाद शहर की सियासत अचानक गर्मा गई है।

भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने अपनी नियुक्ति के लगभग 9 महीने बाद नगर कार्यकारिणी की सूची जारी की।

जिसमें 8 उपाध्यक्ष, 3 महामंत्री और 8 मंत्री सहित कुल 33 पदाधिकारी शामिल किए गए।

लेकिन पूरी सूची में सबसे ज्यादा चर्चा स्वाति कासिद को लेकर है, जिन्हें नगर मंत्री बनाया गया है।

स्वाति, आपराधिक मामलों में घिरे युवराज काशिद उर्फ युवराज उस्ताद की पत्नी हैं।

इसी वजह से संगठन और समाज के भीतर तीखा विरोध शुरू हो गया है।

कार्यालय के बाहर नारेबाजी, पोस्टरों पर कालिख

सूची जारी होते ही भाजपा कार्यालय में भारी हंगामा हो गया।

खाती समाज के कार्यकर्ताओं ने कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के खिलाफ नारेबाजी की।

उनके केबिन के बाहर लगी नेम प्लेट और कार्यालय गेट पर कालिख पोत दी।

इसके अलावा कार्यालय के बाहर लगे बड़े पोस्टर पर भी सुमित मिश्रा के चेहरे पर कालिख लगाई गई और पोस्टर को फाड़ दिया गया।

विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी लगातार खाती समाज के नेताओं को नजरअंदाज कर रही है।

समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा कि भाजपा उनके प्रभावशाली नेता जीतू जिराती को व्यक्तिगत तौर पर टारगेट कर रही है।

उनका कहना था कि खाती समाज के लगभग 80% वोट भाजपा को मिलते हैं।

लेकिन पार्टी संगठन में उनके समाज को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है।

इस विरोध के दौरान 28 से अधिक कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की घोषणा भी कर दी।

युवराज उस्ताद पर हत्या-वसूली सहित कई केस

स्वाति कासिद को मंत्री पद देने को लेकर विवाद इसलिए बढ़ा है क्योंकि उनके पति युवराज काशिद पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं।

नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा ने स्वाति को वार्ड 56 से पार्षद प्रत्याशी बनाया था।

लेकिन युवराज की अपराधिक पृष्ठभूमि सामने आने के बाद पार्टी ने सिर्फ 16 घंटे के भीतर उनका टिकट वापस ले लिया था।

इसके बाद यह टिकट गजानंद गावड़े को दिया गया था।

युवराज काशिद उर्फ युवराज उस्ताद और उसकी गैंग पर अवैध वसूली, विवादित जमीनों के सेटलमेंट और हत्या सहित कई गंभीर आरोप हैं।

उन पर कुख्यात बदमाश जीतू ठाकुर की जेल में हत्या का आरोप भी दर्ज है।

इसके अलावा हत्या के प्रयास के दो केस, कई मारपीट और गैंगस्टर एक्ट जैसे प्रकरण भी रजिस्टर हैं।

युवराज पर प्रशासन ने दो बार रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम) भी लगाया था। उन्हें 2020 में क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था।

उनकी गतिविधियां परदेशीपुरा, बाणगंगा, हीरानगर, किशनगंज और महू क्षेत्र में सक्रिय रही हैं।

सूची में नाम और भाषा की भी गलतियां

जारी सूची में एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है।

इसमें वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल का नाम ‘हेमंत खंडेलवा’ लिखा हुआ है।

इसके अलावा कई पदों के साथ हिंदी भाषा की गलतियाँ भी दिखाई दीं, जिसे लेकर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

नगर निगम चुनाव विवाद के समय तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा ने बयान दिया था कि भाजपा उन लोगों को टिकट नहीं देती जिनकी या उनके परिवार की आपराधिक पृष्ठभूमि हो।

उन्होंने कहा था कि पार्टी की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है। लेकिन अब स्वाति को नगर मंत्री बनाए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी की वही नीति अब लागू नहीं है?

कोषाध्यक्ष और कार्यालय मंत्री बदले

भाजपा की संगठनात्मक गाइडलाइन के अनुसार कोषाध्यक्ष, नगर कार्यालय मंत्री और मीडिया संयोजक जैसे पदों को बिना आवश्यकता बदला नहीं जाना चाहिए।

लेकिन इंदौर नगर कार्यकारिणी में इन सभी पदों पर नई नियुक्तियां कर दी गईं।

कोषाध्यक्ष गुलाब सिंह ठाकुर की जगह सचिन बंसल, कार्यालय मंत्री ऋषि खनुजा की जगह विशाल यादव को जिम्मेदारी दी गई है।

गोलू शुक्ला की विधानसभा से 9 लोग शामिल

नगर कार्यकारिणी में विधानसभा-3 (गोलू शुक्ला) से 9 पदाधिकारी शामिल किए गए हैं।

जिनमें दीपेंद्र सिंह सोलंकी, कैलाश पिपले, स्वाति कासिद, सचिन बंसल, विशाल यादव आदि शामिल हैं। पूरी टीम में 31 नए चेहरे शामिल किए गए हैं।

ललवानी कोटे से महिला मंत्री

कार्यकारिणी में पार्षद कंचन गिदवानी को मंत्री पद दिया गया है, जिन्हें सांसद शंकर ललवानी का कोटा माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि ललवानी कंचन के बेटे को उपाध्यक्ष बनवाना चाहते थे, लेकिन बाद में समझौते के तहत कंचन को मंत्री पद मिला।

मेंदोला, गौड़ और हार्डिया का दबदबा

महामंत्री पद पर नियुक्तियों में रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ और महेंद्र हार्डिया का दबदबा माना जा रहा है। इनके समर्थकों को ही तीनों महामंत्री पद मिले हैं।

उपाध्यक्ष पद से कई नेताओं को संतुष्टि

सुमित मिश्रा ने विभिन्न गुटों में संतुलन साधने के लिए उपाध्यक्ष पद पर कई नेताओं को शामिल कर संतोष रणनीति अपनाई है।

बहरहाल, इंदौर भाजपा की नई नगर कार्यकारिणी के गठन ने आंतरिक असंतोष और जातीय असंतुलन को सामने ला दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ बयानबाजी रह गई है या संगठन जातीय समीकरणों और गुटबाजी के दबाव में अपनी घोषित नीतियों से पीछे हट रहा है?

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