18वें ब्रिक्स समिट का पूरा निचोड़
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर 2026 को 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन हुआ, जिसकी मेजबानी भारत ने की। इस बार सम्मेलन का नारा था “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”, यानी मजबूती, नवाचार, सहयोग और टिकाऊ विकास के लिए निर्माण।
यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या इतने बड़े जमावड़े से कुछ ठोस निकला, या फिर बातचीत ही बातचीत होती रही। जवाब है कि इस बार सम्मेलन से एक स्पष्ट और विस्तृत दस्तावेज सामने आया, जिसे लेकर सभी सदस्य देश सहमत हुए।
सम्मेलन के पहले ही दिन ब्रिक्स देशों ने सर्वसम्मति से एक संयुक्त घोषणापत्र स्वीकार किया, हालांकि सदस्यों के बीच ईरान और यूक्रेन के युद्धों को लेकर मतभेद बने रहे। इस घोषणापत्र को “न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन” यानी नई दिल्ली घोषणापत्र नाम दिया गया,
जिसमें कुल 140 बिंदु शामिल किए गए, जो व्यापार, तकनीक और वैश्विक प्रशासन जैसे विषयों पर केंद्रित थे। इससे साफ है कि यह सम्मेलन सिर्फ बातचीत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक लिखित और विस्तृत समझौते के रूप में सामने आया।
हालांकि यह घोषणापत्र आसानी से नहीं बना। इसमें मध्य पूर्व में संयम बरतने की अपील तो की गई, लेकिन अमेरिका-इजराइल के हमलों या ईरान द्वारा खाड़ी देशों को निशाना बनाए जाने की सीधे तौर पर निंदा नहीं की गई। इसके अलावा घोषणापत्र में अमेरिका का नाम लिए बिना वैश्विक व्यापार युद्ध की आलोचना भी की गई।
एक विश्लेषक के अनुसार, इस गुट में शामिल सदस्य देश, जो इस पश्चिम-विरोधी समूह की सफलता में रुचि रखते हैं, इस सीमित लेकिन ठोस नतीजे से संतुष्ट होंगे। यह भी सामने आया कि भारत ने पर्दे के पीछे मेहनत करते हुए यूएई और ईरान को, जो मौजूदा संघर्ष में विरोधी पक्षों में हैं, इस घोषणापत्र पर राजी करने की सबसे बड़ी बाधा पार की।
आतंकवाद के मुद्दे पर भी ब्रिक्स देशों ने साफ रुख अपनाया। नेताओं ने हर तरह के आतंकवाद की निंदा की और आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या सभ्यता से जोड़ने के प्रयासों को खारिज किया। साथ ही इस घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की भी निंदा की गई,
जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। भारत के लिए यह एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि सीमा पार आतंकवाद का जिक्र पूरे गुट द्वारा स्वीकृत दस्तावेज में शामिल हो सका।
जलवायु परिवर्तन को लेकर भी सदस्य देशों ने पेरिस समझौते के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और विकासशील देशों के लिए वित्त तथा तकनीक तक बेहतर पहुंच की मांग की। इसके अलावा ब्रिक्स कार्बन मार्केट्स पार्टनरशिप के तहत सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर भी कुछ ठोस प्रस्ताव सामने आए। भारत ने ब्रिक्स डिजिटल सार्वजनिक ढांचे का भंडार, स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग सहयोग के लिए इंडिया सेंटर फॉर ब्रिक्स इंडस्ट्रियल कॉम्पिटेंसीज जैसी पहलों का प्रस्ताव रखा। साथ ही भारत की अपनी एआई इम्पैक्ट समिट को भी वैश्विक एआई प्रशासन पर चर्चा में एक योगदान के तौर पर मान्यता दी गई।
भारत की अध्यक्षता में साल भर देश के 25 से अधिक शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें और उच्चस्तरीय आयोजन हुए, जिनका समापन इस शिखर सम्मेलन में हुआ। अगली यानी 19वीं ब्रिक्स समिट की मेजबानी चीन करेगा, जो 2027 में गुट की अध्यक्षता संभालेगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो 18वां ब्रिक्स सम्मेलन पूरी तरह बातचीत तक सीमित नहीं रहा। मतभेदों के बावजूद सदस्य देश एक साझा घोषणापत्र पर सहमत हुए, जिसमें व्यापार, आतंकवाद, जलवायु और तकनीक जैसे विषयों पर स्पष्ट रुख अपनाया गया। जानकारों का मानना है कि इतने विविध और कई बार परस्पर विरोधी हितों वाले देशों का एक मंच पर सहमत हो पाना ही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
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