CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की अनुमति मांगते हुए अटॉर्नी जनरल को पत्र भेजा गया है। चुनाव आयोग में मतभेदों की रिपोर्ट से सियासत तेज है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद अब कानूनी मोर्चे तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी को पत्र भेजकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है।
A Supreme Court advocate has sought the Attorney General for India’s consent to initiate criminal contempt proceedings against Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, alleging wilful disobedience of Supreme Court judgments governing the functioning of the Election Commission of India (ECI).
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#SupremeCourt #ElectionCommissioner #GyaneshKumar #ElectionCommission #ECI— Live Law (@LiveLawIndia) September 24, 2026
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पत्र में मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के कामकाज और उसकी स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
ब्रजेश सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग के फैसलों को ऐसे संचालित किया गया, मानो निर्णय लेने की प्रक्रिया एक व्यक्ति तक सीमित हो।
पत्र में इस व्यवस्था को चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जुड़े सवालों से जोड़ा गया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को लेकर दिए गए सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर एक रिपोर्ट ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर लिखित आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों से था।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता डेटा से जुड़े तकनीकी सिस्टम के दिल्ली में केंद्रीकरण और कुछ प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए। वहीं, चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि विचारों में अंतर को आंतरिक टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के बीच विपक्षी दलों ने भी ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं और उनके खिलाफ पहले दिए गए हटाने के प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की बात कही है। 24 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल इस मुद्दे पर नए सिरे से कार्रवाई की तैयारी में हैं।
फिलहाल अटॉर्नी जनरल को भेजे गए पत्र पर अनुमति मिलती है या नहीं, यह आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है। ऐसे में विवाद के दोनों पक्षों के दावों के बीच अब कानूनी और संस्थागत स्तर पर होने वाली अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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