राम मंदिर CEO की रेस में पूर्व IPS राजेश पांडे, 8 उम्मीदवारों का इंटरव्यू
अयोध्या में राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक फैसला जल्द हो सकता है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO यानी मुख्य कार्यकारी अधिकारी के चयन के लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
मंगलवार को इंटरव्यू के पहले दिन 16 शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों में से 8 उम्मीदवार चयन समिति के सामने पहुंचे। उम्मीदवारों से मंदिर परिसर के प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था और बड़े स्तर पर धार्मिक स्थल के संचालन से जुड़े सवाल पूछे गए।
उम्मीदवारों को अयोध्या स्थित तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र में पहचान पत्र और जरूरी दस्तावेजों के साथ पहुंचने के लिए कहा गया था। दस्तावेजों की जांच के बाद व्यक्तिगत इंटरव्यू शुरू हुए। प्रत्येक उम्मीदवार से करीब आधे घंटे तक बातचीत की गई।
इंटरव्यू में उनके प्रशासनिक और पेशेवर अनुभव के साथ-साथ मंदिर परिसर की सुरक्षा और रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को संभालने की क्षमता पर भी सवाल किए गए।
राम मंदिर के CEO पद की रेस में पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडे का नाम भी शामिल है। 2003 बैच के IPS अधिकारी रहे राजेश पांडे प्रयागराज के रहने वाले हैं और पुलिस सेवा के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ और सहारनपुर जैसे जिलों में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के तौर पर जिम्मेदारी संभाली है।
वह उत्तर प्रदेश STF और ATS से भी जुड़े रहे हैं। उनके कार्यकाल के दौरान कई मुठभेड़ अभियानों में उनकी भूमिका चर्चा में रही थी। उन्होंने 2005 के अयोध्या आतंकी हमले और 2006 के वाराणसी ब्लास्ट की जांच करने वाली टीमों में भी काम किया था।
राजेश पांडे ने इंटरव्यू में शामिल होने की पुष्टि की है। वह 2022 से लखनऊ के अलीगंज हनुमान मंदिर के सचिव के रूप में भी काम कर रहे हैं। इसके अलावा पूर्व जौनपुर जिलाधिकारी दिनेश चंद्र का नाम भी इंटरव्यू देने वाले उम्मीदवारों में बताया गया है।
चयन प्रक्रिया में रिटायर्ड IAS, IPS और सैन्य अधिकारियों समेत कई अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया है।
राम मंदिर CEO पद के लिए देशभर से करीब 5,000 से ज्यादा आवेदन मिलने के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। पद के लिए न्यूनतम योग्यता ग्रेजुएशन, 50 से 70 वर्ष की आयु और कम से कम 20 साल का कार्यकारी नेतृत्व का अनुभव रखा गया था।
इस पद की जरूरत ऐसे समय महसूस की गई जब मंदिर परिसर का संचालन लगातार बड़ा होता जा रहा है और दान से जुड़े कथित गड़बड़ी के मामले के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठे हैं।
CEO के इंटरव्यू में केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों की मंदिर और धार्मिक संस्थानों से जुड़ी समझ पर भी सवाल किए गए।
रिपोर्टों के मुताबिक उम्मीदवारों से उनके सामाजिक और धार्मिक संगठनों से जुड़ाव तथा मंदिरों के संचालन की समझ के बारे में भी जानकारी ली गई। कुछ अन्य रिपोर्टों में उम्मीदवारों से उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली और धार्मिक आस्था से जुड़े सवाल पूछे जाने की बात भी सामने आई है।
इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन समिति तीन नामों को शॉर्टलिस्ट कर सकती है। इसके बाद अंतिम उम्मीदवार का चयन श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट करेगा। प्रस्तावित रूप से नए CEO का कार्यकाल तीन साल का होगा, हालांकि वेतन और अन्य सुविधाओं से जुड़ी अंतिम जानकारी अभी तय नहीं हुई है।
CEO की जिम्मेदारी मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन के साथ-साथ राम मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स और व्यवस्थाओं की निगरानी करना होगी।
राम मंदिर परिसर का विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे में नए CEO से उम्मीद की जा रही है कि वह मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, दान से जुड़ी प्रक्रियाओं और अलग-अलग परियोजनाओं के संचालन को पेशेवर तरीके से संभाल सके।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि चयन समिति किन तीन नामों को अंतिम सूची में शामिल करती है और ट्रस्ट किसे राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO नियुक्त करता है।
‘कांवड़ियों को आतंकवादी कहा तो…’: मौलाना रशीदी पर टी राजा का पलटवार!
You may also like
-
‘कांवड़ियों को आतंकवादी कहा तो…’: मौलाना रशीदी पर टी राजा का पलटवार!
-
एन चंद्रशेखरन का टाटा संस चेयरमैन पद से इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी
-
15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों चुना गया?
-
आजादी के बाद भारत की राजनीति को प्रभावित करने वाले प्रमुख आंदोलन की सूची!
-
कई कालखण्डों में समझिए… काँवड़ यात्रा का इतिहास
