सितंबर में शुरू होगा ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान, शिक्षा और रोजगार पर फोकस करेगी CJP
नीट पेपर लीक के खिलाफ देशभर में चर्चा बटोरने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सितंबर से एक नए राष्ट्रव्यापी अभियान की घोषणा की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बताया कि इस अभियान का नाम “क्या बोलती पब्लिक” रखा गया है, जिसके जरिए पार्टी अलग-अलग राज्यों में जाकर लोगों की समस्याएं सुनेगी और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी।
क्या है ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान?
अभिजीत दीपके के मुताबिक, यह केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी आवाज सुनने का प्रयास होगा। पार्टी का कहना है कि देश में शिक्षा, न्याय और रोजगार जैसे मुद्दों पर खुली चर्चा की जरूरत है और इसी उद्देश्य से सितंबर में यह अभियान शुरू किया जाएगा।
दीपके ने कहा कि यदि आम लोगों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया गया तो जनता खुद सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेगी।
संविधान की विचारधारा पर चलेगी पार्टी
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी विचारधारा को भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को आगे बढ़ाने का काम करेगी।
दीपके ने कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति या नेता के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि आम नागरिकों की भागीदारी के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है।
इन पांच बड़े मुद्दों पर होगा फोकस
1. शिक्षा सुधार
पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है। CJP का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर करने के लिए बड़े बदलाव की जरूरत है।
2. न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता
पार्टी देश की न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की मांग करेगी।
3. रोजगार और बेरोजगारी
युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी को पार्टी ने गंभीर समस्या बताया है। CJP का कहना है कि डिग्री हासिल करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है।
4. युवाओं की भागीदारी
अभियान के दौरान युवाओं को नीति निर्माण और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया में शामिल करने पर भी जोर दिया जाएगा।
5. सामाजिक सुधार
पार्टी का दावा है कि उसका अंतिम लक्ष्य केवल चुनावी राजनीति नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।
“राजनीति नहीं, समाज सेवा हमारा लक्ष्य”
अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी पार्टी पारंपरिक राजनीति से अलग रास्ते पर चलना चाहती है। उनका मानना है कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सत्ता परिवर्तन से नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी से संभव है।
