देश की जनता झूठी, बस नितिन गडकरी ही सच्चे!

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देश की जनता झूठी बस नितिन गडकरी ही सच्चे!

पूरे देश की जनता इस समय एथेनॉल को लेकर भारी परेशानी का सामना कर रही है। एथेनॉल युक्त ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज (एवेरेज) लगातार कम हो रहा है, गाड़ियां खराब हो रही हैं और बीच रास्ते में बंद हो रही हैं। देश भर के वाहन मालिक और मैकेनिक इस बात की गवाही दे रहे हैं कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उनके वाहनों के इंजिन को धीरे-धीरे तबाह कर रहा है।

लेकिन, केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इस जन-शिकायत को सुनने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं हैं। वे बस आँख बंद करके एक ही बात रट रहे हैं कि एथेनॉल से इंजिन को कोई नुकसान नहीं होता। उनके इस अडियल रवैये से ऐसा लगता है मानो वे पूरे देश की जनता को झूठा साबित करने पर तुले हुए हैं और सिर्फ वही सच बोल रहे हैं।

एथेनॉल से परेशान जनता की आपबीती

देश के कोने-कोने से वाहन मालिक एथेनॉल युक्त ईंधन के इस्तेमाल के दुष्परिणामों को लेकर शिकायतें कर रहे हैं। सबसे प्रमुख शिकायत वाहनों के माइलेज में भारी गिरावट को लेकर है। लोगों का कहना है कि जहां उनकी गाड़ियां पहले एक लीटर पेट्रोल में 15-18 किलोमीटर का माइलेज देती थीं, अब वह घटकर 10-12 किलोमीटर रह गया है। यह गिरावट इतनी ज़्यादा है कि वाहन मालिकों के जेब पर इसका असर साफ तौर पर देखा जा सकता है।

इसके अलावा, गाड़ियों के इंजिन भी एथेनॉल की वजह से खराब हो रहे हैं। मैकेनिकों के मुताबिक, एथेनॉल में मौजूद नमी की वजह से इंजिन के अंदरूनी हिस्सों में जंग लग रहा है, खासकर कार्बोरेटर और इंजिन ब्लॉक में। इससे इंजिन में रुकावट आती है, गाड़ियां स्टार्ट होने में दिक्कत करती हैं और कई बार तो बीच रास्ते में ही बंद हो जाती हैं। इससे वाहन मालिकों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

गडकरी की ज़िद और देश की जनता का दर्द

इन सब शिकायतों के बावजूद, नितिन गडकरी एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर अड़े हुए हैं। वे बार-बार दावा करते हैं कि एथेनॉल से इंजिन को कोई नुकसान नहीं होता और इससे प्रदूषण भी कम होता है। लेकिन, उनके इस दावे को देश भर की जनता की आपबीती और मैकेनिकों के अनुभव सिरे से खारिज करते हैं। गडकरी की ज़िद से ऐसा लगता है मानो वे पूरे देश की जनता को मूर्ख समझते हैं और उन्हें लगता है कि वे जो कह रहे हैं, वही परम सत्य है।

गडकरी को देश की जनता के दर्द और परेशानियों को समझना चाहिए। उन्हें एथेनॉल के इस्तेमाल को थोपने के बजाय, इसके दुष्परिणामों को लेकर ईमानदार और पारदर्शी तरीके से जांच करानी चाहिए। अगर एथेनॉल से इंजिन को नुकसान हो रहा है, तो उन्हें तुरंत इसके इस्तेमाल पर रोक लगानी चाहिए या इसके दुष्प्रभावों को कम करने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए

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