एमपी में बड़ा ‘गेहूं घोटाला’: 13 जिलों से 7,168 टन सरकारी गेहूं गायब, 18 करोड़ से ज्यादा की लगी चपत!
मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों और परिवहन व्यवस्था में एक ऐसा झोल सामने आया है, जिसने सबके होश उड़ा दिए हैं। सूबे के किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया 7,168 टन गेहूं गोदामों तक पहुंचने से पहले ही रस्ते में ‘गायब’ हो गया। शुरुआती जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वो किसी बड़े घालमेल की तरफ इशारा कर रहे हैं।
यदि सरकारी रेट के हिसाब से हिसाब लगाया जाए, तो ₹2625 प्रति क्विंटल की दर से इस गायब हुए गेहूं की कुल कीमत 18 करोड़ 82 लाख रुपये बैठती है। जनता की गाढ़ी कमाई और किसानों के पसीने की फसल का यह हिस्सा आखिर किसकी जेब में गया, अब इसकी परतें खोली जा रही हैं।
जांच के लिए मैदान में उतरे बड़े अफसर
मामला जैसे ही भोपाल के गलियारों में गूंजा, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग की अपर मुख्य सचिव को इस पूरे कांड की बारीकी से जांच करने का जिमा सौंप दिया गया है।
इसी सिलसिले में खाद्य विभाग के संयुक्त संचालक एच.एस. परमार मंगलवार को खुद सागर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों की टीम को साथ लिया और अलग-अलग वेयरहाउसों का रिकॉर्ड खंगाला। शुरुआती जांच में पता चला है कि अकेले सागर जिले में ही 1166 टन गेहूं खरीदी केंद्रों से तो निकला, लेकिन गोदामों के गेट तक कभी पहुंचा ही नहीं। आशंका जताई जा रही है कि खरीदी केंद्रों और परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) के दौरान ही इस माल को रस्ते में ही ठिकाने लगा दिया गया।
किस जिले से कितना गेहूं हुआ ‘रफूचक्कर’?
इस पूरे खेल में जबलपुर और सागर जिले सबसे आगे हैं। नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि किस जिले में सरकारी गेहूं की कितनी ‘हेराफेरी’ हुई है:
| जिला | गायब गेहूं की मात्रा (टन में) |
| जबलपुर | 1,433 टन |
| सागर | 1,166 टन |
| नरसिंहपुर | 804 टन |
| विदिशा | 694 टन |
| सतना | 551 टन |
| आगर मालवा | 518 टन |
| उज्जैन | 396 टन |
| राजगढ़ | 330 टन |
| शाजापुर | 330 टन |
| रीवा | 308 टन |
| रायसेन | 253 टन |
| सिवनी | 220 टन |
| अशोकनगर | 165 टन |
| कुल गायब गेहूं | 7,168 टन |
परिवहन माफिया और बिचौलियों पर शक की सुई
सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में परिवहन करने वाले ठेकेदारों, खरीदी केंद्रों के प्रभारियों और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता। किसान अपना अनाज देकर पावती ले चुके हैं, सरकार के खाते से पैसा भी तय हो चुका है, लेकिन बीच रास्ते से हजारों टन अनाज का गायब होना सुरक्षा और निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े करता है।
अब देखना यह होगा कि अपर मुख्य सचिव की इस जांच में कौन-से बड़े नाम सामने आते हैं और सरकार इन ‘गेहूं चोरों’ पर क्या कड़ा एक्शन लेती है।
बड़ी बात: 13 जिलों के इस घालमेल ने यह साबित कर दिया है कि कागजों पर होने वाली मॉनिटरिंग और हकीकत में जमीन पर चल रहे खेल में कितना बड़ा अंतर है।
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