प्रदेश प्रमुख के खेल में पिस जाएगी पंजाब कांग्रेस!

Share Politics Wala News

भाजपा के बढ़ते कद और कांग्रेस के होते छत-विक्षत हालात से एक बात तो तय है कि कांग्रेस में बहुत ज्यादा सुधारों की जरूरत है।

देश की विपक्षी पार्टी ही अगर इस कदर अपने ही अंदर सुलग रही आग का निराकरण नहीं कर सकती, उसका निवारण नहीं खोज सकती, तो भाजपा के मिशन 360 का आंकड़ा पार होने में ज्यादा समय नहीं है। और कांग्रेस के हाथ पंजाब नहीं लगने वाला!

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के टूटने के बाद अब पंजाब कांग्रेस में भी आग लग चुकी है। दरअसल, फरवरी 2027 में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष न बनाए जाने से नाराज पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने मोर्चा खोल दिया है।

यह सब बातें हवा में नहीं हो रही हैं, बल्कि इसके चलते चन्नी ने अपने घर मोरिंडा में कांग्रेस नेताओं के साथ इमरजेंसी बैठक भी की। इस बैठक में तीन मौजूदा विधायक और तकरीबन 50 से ज्यादा नेता शामिल रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के खेमे को लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बने रहना स्वीकार नहीं है। इसलिए पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के समर्थकों ने हाईकमान से इस फैसले पर रिकंसीडर करने की मांग की।

वहीं दूसरी तरफ, गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। उन्होंने पंजाब कांग्रेस में चल रहे इस द्वंद्व से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि पंजाब कांग्रेस के हालात के बारे में चन्नी और राजा वड़िंग से पूछिए। इतनी बैठकें करने के बाद भी यह स्थिति आ गई, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। वहीं अमित शाह से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि यह पहले से तय कार्यक्रम था।

पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी के घर पर मौजूद रहे नेताओं के नाम क्रमशः

MLA तृप्त राजिंदर बाजवा,
बरनाला के विधायक काला ढिल्लों,
कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत,
पूर्व डिप्टी सीएम ओपी सोनी,
पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू,
गुरकीरत कोटली,
पूर्व MLA गुरप्रीत कांगड़,
नाजर सिंह मानशाहिया,
पूर्व विधायक परमिंदर सिंह पिंकी,
दविंदर सिंह घुबाया,
इंद्रबीर सिंह बुलारिया,
लखबीर लक्खा,
तरसेम डीसी,
दर्शन बराड़,
हरमिंदर सिंह गिल,
मदनलाल जलालपुर,
यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों,
कमलजीत कड़वल,
पूर्व सांसद मोहम्मद सदीक,
पूर्व विधायक जोगिंदर पाल,
दिनेश बस्सी,
दलबीर गोल्डी,
पूर्व विधायक पिरमल सिंह और सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी इस बैठक में मौजूद रहे

पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व में हुई इस बैठक से एक बात तो साफ हो गई कि हाईकमान के रणनीतिकार अपनी काबिलियत पर शक कर सकते हैं। क्योंकि जब भाजपा रूपी भेड़िया सब कुछ निगल जाने के मूड में हो और कांग्रेस को अपने भीतर लगी आग का ही आभास न हो, तो हाईकमान पर उंगली तो उठेगी ही। पूर्व MLA दर्शन बराड़ ने तो यहां तक कह दिया कि अगर चन्नी को प्रदेश प्रमुख नहीं बनाया गया, तो पंजाब में कांग्रेस की सरकार नहीं बन सकती।

इस तरह की स्थिति और इस आपसी रंजिश के चलते पंजाब में कांग्रेस की सरकार का न बनना तो तय है। पूर्व MLA दर्शन बराड़ की इस बात से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक इत्तेफाक रखते होंगे। लेकिन एक बात कांग्रेस को और जान लेनी चाहिए कि कांग्रेस सिर्फ इस बार चुनाव नहीं हारेगी, बल्कि जब तक केंद्र में भाजपा कमजोर नहीं होती, तब तक पंजाब भाजपा से वापस लेना कांग्रेस के लिए दांतों तले पसीना लाने जैसा होगा।

आपको बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष बनने-बनाने को लेकर इतनी जद्दोजहद क्यों है? यह चर्चा इसलिए है क्योंकि पंजाब में चलन रहा है कि जो भी प्रदेश अध्यक्ष रहता है, वही मुख्यमंत्री बनता है। कैप्टन अमरिंदर सिंह दोनों बार चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए और जब पार्टी ने चुनाव जीता, तो उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाया गया।

यही वजह रही है कि चन्नी और राजा वड़िंग के समर्थकों में टकराव बना रहता है। कई बार तो चन्नी, राजा वड़िंग को फेल लीडर बता चुके हैं और उन्हें प्रदेश प्रमुख के पद से हटाने की वकालत भी कर चुके हैं।

2022 में नवजोत सिद्धू कांग्रेस के प्रदेश प्रमुख थे और चरणजीत सिंह चन्नी मुख्यमंत्री। इसलिए तब हाईकमान पर दबाव डाला गया कि मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। इसकी वजह यह थी कि प्रदेश प्रमुख सिद्धू थे और मुख्यमंत्री चन्नी। चन्नी पंजाब कांग्रेस के इस ट्रेंड से वाकिफ थे कि अगर सिद्धू की प्रदेश प्रमुखी में चुनाव जीता गया, तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलना मुश्किल हो जाएगा

इसलिए सिद्धू को उकसाया गया और अंदरूनी तौर पर चन्नी लॉबिंग करते रहे। फिर पहली बार कांग्रेस ने पंजाब में औपचारिक तौर पर चन्नी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया। माना जा रहा है कि चन्नी उसी पैटर्न पर चल रहे हैं।

यह भी पढ़ें- जीतू सरकार को घेरने के चक्कर में घर को ही नहीं संभाल पा रहे…..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *