करीब दो साल बाद विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित हुई।
गठबंधन की यह सातवीं बैठक थी, जिसमें 25 राजनीतिक दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। वहीं शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस वार्ता में बताया कि लगभग दो घंटे तक चली चर्चा में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं, किसानों और आम लोगों से जुड़े विषयों को लेकर विपक्षी दलों ने एक साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया है।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा नीट और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विवादों को लेकर हुई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। विपक्ष का कहना है कि इस पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और सरकार को छात्रों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए।
इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने मतदाता सूची के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई। गठबंधन का कहना है कि लोकतंत्र में हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं होनी चाहिए। इसी विषय पर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग करने का फैसला भी लिया गया।
बैठक में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और देश की आर्थिक स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विपक्षी दलों ने कहा कि इन मुद्दों का सीधा असर आम जनता के जीवन पर पड़ रहा है। गठबंधन ने केंद्र सरकार से इन विषयों पर गंभीर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
इंडिया ब्लॉक ने भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की। नेताओं ने तय किया कि गठबंधन की बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी ताकि विभिन्न मुद्दों पर समन्वय बना रहे। साथ ही संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर सहमति बनी।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने इस बैठक को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि इंडिया ब्लॉक के भीतर कई राजनीतिक मतभेद हैं और विभिन्न राज्यों में गठबंधन के सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा का दावा है कि विपक्षी गठबंधन केवल राजनीतिक अवसर के लिए एकजुट हुआ है और इसके पास कोई स्पष्ट साझा दृष्टि नहीं है।
हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने गठबंधन की एकजुटता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और सभी दलों को साथ लेकर चलना समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मतभेद किसी भी गठबंधन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन बातचीत के माध्यम से उनका समाधान निकाला जा सकता है।
जानकारों के अनुसार यह बैठक इंडिया ब्लॉक के लिए एक अहम परीक्षा मानी जा रही थी। पिछले कुछ समय से गठबंधन की सक्रियता और एकजुटता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में विपक्षी दलों का एक मंच पर आकर राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इंडिया ब्लॉक शिक्षा, महंगाई, बेरोजगारी और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर जनता के बीच मजबूत संदेश देने में सफल होता है या फिर आंतरिक मतभेद उसकी राह में चुनौती बने रहते हैं।
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