कर्नाटक के बहाने 70 साल की पड़ताल .. CM बदलना, पार्टी डुबाना आलाकमान का ‘शौक’

Share Politics Wala News

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा- मैंने पहले ही कहा था कि हाईकमान जब कहेगा, मैं इस्तीफा दे दूंगा। कल हाईकमान ने कहा और आज मैंने इस्तीफा दे दिया।

आखिर कांग्रेस हाईकमान ऐसा क्यों करता है ? क्यों कांग्रेस में बार बार मुंख्यमंत्री के चेहरे को लेकर लड़ाई छिड़ती है? जिस भी राज्य में कांग्रेस सत्ता में आती है वहां ऐसा तमाशा होता ही है। हाई कमान के तय नाम पर भी विवाद होता है। और ये आज की बात नहीं है जब कांग्रेस पूरे देश में अकेली सबसे बड़ी पार्टी थी तब भी हाईकमान ऐसे खेल खेलता रहा है।
हाईकमान के ऐसे ही खेल पर आज की पीएम टाइम रिपोर्ट

 पंकज मुकाती

कर्नाटक में अब डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री होंगे। सिद्दारमैया ने इस्तीफा दे दिया। हाईकमान के कहने पर। यही असली कांग्रेस है। न कोई बैठक न चर्चा। हो गया सीएम का इस्तीफा। कारण। दूसरे गुट ने भी दावेदारी कर दी सीएम पद पर। कांग्रेस में ये ही काम क्यों होता है। चुनाव के पहले से

ही पार्टी दो तीन लोगों को बड़े सपने दिखाती है। फिर उनको मान मनोवल करती है, सपने पूरे न होने पर वो नेता धमकी देता है. फिर सीएम का बदलाव।
ऐसा सभी पार्टियों में होता है। पर कांग्रेस में ये कुछ ज्यादा ही है। मध्यप्रदेश में कमलनाथ के सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया खड़े हो गए। उनकी नहीं सुनी
गई। सरकार ही गिर गई। कांग्रेस फिर 2023 में भी बुरी तरह हार गई।

छत्तीसगढ़ में भी 2018 में टी एस सिंहदेव और भूपेश बघेल दो दावेदार सामने आये। पार्टी ने उस वक्त मामला निपटाने को सिंहदेव को कह दिया ढाई साल बघेल फिर ढाई साल आपको सीएम बनवा देंगे।

सिंहदेव ढाई साल बाद दिल्ली को अपने वादे की याद दिलाते रहे, आलाकमान ने बघेल पर ही भरोसा जताया। पार्टी में फूट पड़ी। 2023 के चुनाव में दोनों
गट एक दूसरे को निपटाने में लगे रहे। कांग्रेस सत्ता से बुरी तरह बाहर।

आखिर आलाकमान मजबूत क्यों नहीं है। उसकी कोई सुनता क्यों नहीं है। ये तो अभी की बात पर कांग्रेस में ये बीमारी आज की नहीं है। आलाकमान मनमानी करता ही रहा है। उसके लिए कांग्रेस की मजबूती से ज्यादा अपनी पसंद और जी हुजूरे रहे। आलाकमान की सनक की कुछ पुरानी कहानी भी
देख लेते है। देखते हैं दस बड़े ऐसे बदलाव जिसमे आलाकमान ने सीएम बार बार बदले

कहानी मध्यप्रदेश से शुरू करते है

1 . मध्य प्रदेश (1985–1990) की कांग्रेस सरकार। प्रधानमंत्री राजीव गांधी

पांच सालों में कांग्रेस ने चार बार मुख्यमंत्री बदले
सबसे पहले अर्जुन सिंह, फिर उनको हटाकर मोतीलाल वोरा,
फिर अर्जुन सिंह, फिर मोतीलाल वोरा और अंत में श्यामाचरण शुक्ल अब आप ही बताइये ऐसी क्या जरुरत रही होगी।

2 . बिहार (1961–1967) — 4 मुख्यमंत्री
श्रीकृष्ण सिन्हा की मृत्यु के बाद लगातार नेतृत्व बदला।
श्रीकृष्ण सिन्हा, दीप नारायण सिंह, बिनोदानंद झा, के.बी. सहाय

3 . आंध्र प्रदेश (1978–1983) — 4 मुख्यमंत्री
हाईकमान के दखल और अंदरूनी राजनीति के कारण बार-बार CM बदले गए।
मर्री चेन्ना रेड्डी, टी. अंजैया, भवानम वेंकटरामी रेड्डी, कोटला विजय भास्कर रेड्डी

4 . बिहार (1985–1990) — 4 मुख्यमंत्री
कांग्रेस में गुटबाजी और नेतृत्व संकट बना रहा।
बिंदेश्वरी दुबे, भागवत झा आजाद, सत्येंद्र नारायण सिन्हा, जगन्नाथ मिश्रा

5 महाराष्ट्र (1985–1990) — 4 मुख्यमंत्री
भ्रष्टाचार विवाद और राजनीतिक अस्थिरता के कारण कई बार CM बदले गए।
वसंतदादा पाटिल, शिवाजीराव पाटिल निलंगेकर, शंकरराव चव्हाण, शरद पवार

6. बिहार (1972–1977) — 3 मुख्यमंत्री
राजनीतिक अस्थिरता के चलते कई बार नेतृत्व बदला।
केदार पांडेय, अब्दुल गफूर, जगन्नाथ मिश्रा

7. आंध्र प्रदेश (1989–1994) — 3 मुख्यमंत्री
कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान के कारण एक ही कार्यकाल में 3 CM बने।
मर्री चेन्ना रेड्डी, एन. जनार्दन रेड्डी, कोटला विजय भास्कर रेड्डी

8. कर्नाटक (1990–1994) — 3 मुख्यमंत्री
बीमारी, विवाद और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण नेतृत्व बदलता रहा।
वीरेंद्र पाटिल, एस. बंगारप्पा, वीरप्पा मोइली

9. पंजाब (2017–2022) — 2 मुख्यमंत्री
कैप्टन अमरिंदर और नवजोत सिद्धू विवाद के बाद चुनाव से पहले CM बदला गया।
अमरिंदर सिंह, चरणजीत सिंह चन्नी

10. उत्तराखंड (2012–2017) — 2 मुख्यमंत्री + राष्ट्रपति शासन
कांग्रेस में बगावत के बाद राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा।
विजय बहुगुणा, हरीश रावत, राष्ट्रपति शासन (2016)

यानी कुल मिलाकर प्रचंड बहुमत हो या झूले वाली सरकार कांग्रेस आलाकमान अपने मोहरे बदलता ही रहता हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अभी नेतृत्व कमजोर है इसलिए ऐसा हो रहा है। पहले नेतृत्व इतना मजबूत और मनमाना रहा कि वो अपनी मनमानी करता रहा।

खैर देखते हैं कर्नाटक के नाटक से कांग्रेस कितना बदलती है।

यह भी पढ़ें- गाय दूध दे तब तक ही माँ, उसके बाद काटने लायक!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *