दौर बना उम्मीद की राजधानी, स्वच्छता के बाद इंदौर अंगदान में आगे
इंदौर ने अंगदान की झिझक की सोच को बदल दिया है। यहां अब केवल किडनी, लिवर या कॉर्निया ही नहीं, बल्कि ब्रेन डेड मरीजों के हार्ट भी समय से दूसरे शहरों तक पहुंचाए जा रहे हैं, ताकि किसी की बुझती सांसों को फिर से धड़कन मिल सके। यही वजह है कि इंदौर आज देश में अंगदान की एक मजबूत पहचान बनकर उभर रहा है।
ताजा ब्रेन डेड गौरव दवे के मामले के साथ इंदौर से अब तक 26वीं बार किसी ब्रेन डेड डोनर का हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए दूसरे शहर भेजा गया है। हर बार ग्रीन कॉरिडोर बनता है, सायरन बजते हैं, सड़कें खाली होती हैं और कुछ ही मिनटों में एक दिल सैकड़ों किलोमीटर दूर किसी दूसरे इंसान के शरीर में नई जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंच जाता है।
अंगदान का निर्णय किसी भी परिवार के लिए आसान नहीं होता। जिस पल परिवार अपने प्रियजन को खोने का दर्द झेल रहा होता है, उसी समय लिया गया एक साहसिक फैसला कई अनजान लोगों के घरों में खुशियां लौटा देता है।यही वजह है कि अंगदान को महादान कहा जाता है।
एक ब्रेन डेड डोनर का हार्ट, लिवर, दोनों किडनी, कॉर्निया और अन्य अंग कई मरीजों को नया जीवन दे सकते हैं। यानी एक व्यक्ति की अंतिम विदाई, कई परिवारों के लिए नई शुरुआत बन जाती है।
इंदौर बना उम्मीद की नई राजधानी
पिछले कुछ वर्षों में इंदौर ने अंगदान के क्षेत्र में लगातार उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। शहर में ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था, अस्पतालों का बेहतर समन्वय, पुलिस की तत्परता और सबसे बढ़कर लोगों की जागरूकता ने अंगदान को एक जनआंदोलन का स्वरूप दिया है।
आज जब भी किसी ब्रेन डेड मरीज के परिजन अंगदान का निर्णय लेते हैं, पूरा प्रशासन और चिकित्सा तंत्र समय के खिलाफ दौड़ पड़ता है, ताकि एक भी अंग व्यर्थ न जाए।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जिस दिल की धड़कन एक परिवार के लिए हमेशा के लिए थम जाती है, वही दिल किसी दूसरे परिवार के लिए उम्मीद बनकर धड़कने लगता है। यही अंगदान की सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए डॉक्टर कहते हैं कि “दिल सिर्फ शरीर नहीं बदलता, कई जिंदगियों की किस्मत बदल देता है।”
एक संदेश… जो हर जिंदगी तक पहुंचना चाहिए
किसी की मृत्यु को कोई नहीं रोक सकता, लेकिन उसके बाद भी उसकी धड़कन, उसकी आंखें और उसके अंग किसी दूसरे इंसान को जीवन दे सकते हैं। इंदौर के इन 26 दिलों ने सिर्फ मरीजों की जान नहीं बचाई,
बल्कि यह संदेश भी दिया है कि इंसान की सबसे बड़ी विरासत उसकी संपत्ति नहीं, बल्कि वह जीवन है जो वह किसी और को दे जाए। इसीलिए आज इंदौर सिर्फ स्वच्छता में नहीं, बल्कि संवेदनाओं और अंगदान की संस्कृति में भी पूरे देश के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
संदीपन आर्य (सेवादार व काउंसलर, मुस्कान ग्रुप पारमार्थिक ट्रस्ट ने बताया कि इंदौर में 2015 से अब तक हुए 26 हार्ट डोनेशन में पुरुष और महिला, दोनों ही डोनर शामिल रहे हैं। उनका कहना है कि हर सफल अंगदान सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद लेकर आता है।
उन्होंने कहा कि अंगदान के क्षेत्र में काम करते हुए जब किसी ऐसे मरीज से मुलाकात होती है, जो केवल अंग नहीं मिलने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा होता है, तो यह एहसास होता है कि इस दिशा में और अधिक काम करने की जरूरत है। ऐसे मरीज भी हमारे अपने भाई-बहन हैं और उन्हें नया जीवन दिलाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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