#politicswala Report
एआई संचालित एक नई तकनीक उन पुरुषों में शुक्राणु कोशिकाओं (स्पर्म सेल्स) का पता लगा रही है, जिन्हें बताया गया था कि उनके पास एक भी शुक्राणु नहीं है. यह तकनीक उन जोड़ों को माता-पिता बनने का एक और मौका दे रही है जो सालों से कोशिश कर रहे हैं.
नवंबर 2025 की शुरुआत में, अमेरिका के न्यू जर्सी में अपने घर की ओर गाड़ी चलाकर लौटते समय पेनेलोप को एक कॉल आया. यह उनके डॉक्टर का फोन था, जो वह खबर दे रहे थे- जिसका पेनेलोप को बेसब्री से इंतज़ार था. ढाई साल की पीड़ादायक कोशिशों के बाद, पेनेलोप आखिरकार गर्भवती थीं.
“बीबीसी” में कृपा पाधी की रिपोर्ट में कहा गया है कि आज के युग में जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है, चिकित्सा विज्ञान में इसका एक अत्यंत मानवीय और भावनात्मक अनुप्रयोग सामने आया है. कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘स्टार’ सिस्टम उन पुरुषों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिन्हें चिकित्सा जगत ने ‘एज़ोस्पर्मिक’ घोषित कर दिया था, यानी वे पुरुष जिनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या शून्य मानी गई थी.
विश्व स्तर पर बांझपन एक गंभीर समस्या है, जो प्रजनन आयु के हर छह में से एक व्यक्ति को प्रभावित करती है. इसमें ‘पुरुष बांझपन’ का योगदान लगभग 50% मामलों में होता है. विशेष रूप से 1% पुरुष एज़ोस्पर्मिया से पीड़ित होते हैं. सैमुअल और पेनेलोप की कहानी इस संघर्ष का एक जीवंत उदाहरण है. सैमुअल क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम से ग्रस्त थे, जो एक आनुवंशिक स्थिति है जहाँ पुरुष एक अतिरिक्त ‘एक्स’ क्रोमोसोम के साथ पैदा होते हैं. इस स्थिति में शुक्राणुओं का उत्पादन न के बराबर होता है. सैमुअल को बताया गया था कि उनके जैविक पिता बनने की संभावना मात्र 20% है, जो किसी भी व्यक्ति के लिए एक गहरा मनोवैज्ञानिक झटका हो सकता है.
‘स्टार’ सिस्टम के विकास की कहानी अत्यंत रोचक है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी फर्टिलिटी सेंटर के निदेशक ज़ेव विलियम्स को इस तकनीक का विचार 2020 में खगोल विज्ञान के एक लेख से मिला. लेख में बताया गया था कि कैसे एआई का उपयोग ब्रह्मांड के विशाल डेटा में नए और धुंधले सितारों को खोजने के लिए किया जा रहा है. विलियम्स ने महसूस किया कि एक बांझ पुरुष के ऊतकों या वीर्य के नमूने में एक दुर्लभ शुक्राणु को खोजना भी एक विशाल आकाश में छोटे तारे को खोजने जैसा ही है.
मानवीय रूप से, एक तकनीशियन के लिए माइक्रोस्कोप के नीचे घंटों तक नमूने की एक-एक बूंद की जांच करना न केवल थकाऊ है, बल्कि इसमें त्रुटि की संभावना भी अधिक रहती है. ‘स्टार’ सिस्टम ने इसी समस्या का समाधान किया.
माइक्रोफ्लुइडिक्स और एआई का संगम
‘स्टार’ सिस्टम केवल एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग और एआई का एक जटिल मिश्रण है: माइक्रोफ्लुइडिक चिप्स: इसमें मानव बाल जितने पतले चैनल होते हैं, जिनसे होकर नमूना प्रवाहित होता है. हाई-स्पीड इमेजिंग: जैसे ही नमूना बहता है, सिस्टम प्रति सेकंड 300 छवियों की दर से तस्वीरें लेता है. एआई एल्गोरिदम: एआई इन छवियों का वास्तविक समय (रियल टाइम) में विश्लेषण करता है. यह कचरे, कोशिका के टुकड़ों और मलबे के ‘समुद्र’ में उस एक दुर्लभ, सक्रिय शुक्राणु को पहचान लेता है. जैसे ही एआई शुक्राणु की पहचान करता है, एक रोबोटिक प्रणाली मिलीसेकंड के भीतर उस विशिष्ट हिस्से को अलग कर लेती है, जिससे शुक्राणु को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके.
परीक्षणों में पाया गया कि यह तकनीक मानवीय खोज की तुलना में 40 गुना अधिक प्रभावी है और इसकी संवेदनशीलता दर 100% है.
सफलता की पहली किरण
इस तकनीक की पहली बड़ी सफलता पिछले साल के अंत में मिली जब एक जोड़ा, जो 20 वर्षों से बांझपन से जूझ रहा था, ‘स्टार’ बेबी का माता-पिता बना. सैमुअल और पेनेलोप के मामले में भी यह तकनीक चमत्कारिक रही. सैमुअल के अंडकोष (टेस्टिकल्स) से प्राप्त ऊतकों में एआई ने 8 शुक्राणु खोज निकाले. इनमें से एक भ्रूण (ब्लास्टोसिस्ट) के रूप में विकसित हुआ और जुलाई 2026 में उनके घर पहले बेटे का आगमन संभावित है.
वर्तमान में, इस तकनीक का उपयोग करने वाले 175 रोगियों में से लगभग 30% मामलों में शुक्राणु खोजने में सफलता मिली है—ये वे लोग थे जिनके पास पहले कोई उम्मीद नहीं थी.
भविष्य की राह और सावधानियाँ
हालाँकि ‘स्टार’ सिस्टम ने चिकित्सा विज्ञान में नई ऊँचाइयों को छुआ है, लेकिन विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह भी देते हैं. वारविक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सियोभान क्वेंबी के अनुसार, एआई के उत्साह में अक्सर ‘हैप्पी एंडिंग’ का अति-वादा कर दिया जाता है. बांझपन के उपचार महंगे होते हैं और जोड़े भावनात्मक रूप से असुरक्षित होते हैं. इसलिए, इस तकनीक के व्यापक उपयोग से पहले बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों और नैतिक दिशा-निर्देशों की आवश्यकता है. चिकित्सा डेटा की गोपनीयता और जवाबदेही भी महत्वपूर्ण चुनौतियाँ हैं.
‘स्टार’ सिस्टम केवल एक तकनीकी आविष्कार नहीं है, बल्कि यह उस मानवीय इच्छाशक्ति का प्रतीक है जो विज्ञान के माध्यम से असंभव को संभव बनाने का प्रयास करती है. जहाँ पहले केवल ‘निराशा’ और ‘बांझपन’ जैसे शब्द थे, अब वहाँ ‘एआई’ और ‘उम्मीद’ ने अपनी जगह बना ली है. सैमुअल जैसे लाखों पुरुषों के लिए, यह तकनीक उनके अपने जैविक परिवार का सपना पूरा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है. यह विज्ञान की उस शक्ति को दर्शाता है जो सुदूर अंतरिक्ष के सितारों को खोजने वाली तकनीक का उपयोग करके धरती पर नए जीवन की मुस्कान ला सकती है.
