NCERT की किताब में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर पर CJI सख्त: कहा न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं, खुद देखेंगे मामला

Share Politics Wala News

NCERT की किताब में ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर पर CJI सख्त: कहा न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं, खुद देखेंगे मामला

सुप्रीम कोर्ट में उठा मामला, CJI ने जताई नाराजगी

Supreme Court of India की बेंच में क्लास 8 की NCERT की नई सोशल साइंस किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ विषय शामिल किए जाने का मुद्दा उठाया गया।

चीफ जस्टिस Surya Kant ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि किसी को भी न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

उन्होंने संकेत दिया कि कोर्ट इस मामले में स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई पर विचार कर सकता है और वे खुद इस पूरे मामले को देखेंगे।

NCERT के नए चैप्टर में क्या है खा

National Council of Educational Research and Training (NCERT) की नई पुस्तक में न्यायपालिका की संरचना समझाने के साथ-साथ न्यायिक व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियो जैसे भ्रष्टाचार और लंबित मामलों पर भी चर्चा की गई है।

किताब में सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, हाईकोर्ट्स में 62 लाख से अधिक और जिला व अधीनस्थ अदालतों में 4 करोड़ 70 लाख से ज्यादा लंबित मामलों का जिक्र है।

साथ ही जजों के लिए आचार संहिता, आंतरिक जवाबदेही तंत्र और शिकायत निवारण प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई है।

वरिष्ठ वकीलों ने जताई आपत्ति

सीनियर एडवोकेट Kapil Sibal ने कोर्ट में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि 8वीं कक्षा के छात्रों को न्यायिक भ्रष्टाचार पढ़ाना चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि यह बार काउंसिल की भी चिंता है।

वहीं, Abhishek Manu Singhvi ने सवाल उठाया कि केवल न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर फोकस करना चयनात्मक प्रतीत होता है, जबकि अन्य संस्थानों में भ्रष्टाचार पर किताब में चर्चा नहीं है। इस पर बेंच ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार किया।

किताब में जवाबदेही और पारदर्शिता पर भी जोर

पुस्तक में यह भी बताया गया है कि जजों को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संसद महाभियोग प्रस्ताव पारित कर सकती है और जांच के बाद ही इस पर निर्णय लिया जाता है।

यह भी पढ़ें- NCERT की नई पहल: कक्षा 8 की किताब में क्रांतिकारियों को मिला सही सम्मान, लोगों ने किया मुगल चैप्टर हटाने का दावा

साथ ही सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (CPGRAMS) के जरिए शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था का उल्लेख है।

किताब में पूर्व CJI B. R. Gavai के बयान का हवाला देते हुए कहा गया है कि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक मूल्यों का हिस्सा हैं तथा न्यायपालिका में विश्वास बनाए रखने के लिए ठोस और पारदर्शी कदम जरूरी हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *