राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को कहा मेरे गद्दार दोस्त, फिर बढ़ाना अपना हाथ!
मेरे गद्दार दोस्त’: लोकसभा के बाहर राहुल गांधी–रवनीत बिट्टू में तीखी नोकझोंक!
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी जुबानी झड़प देखने को मिली। यह पूरा घटनाक्रम संसद के मकर द्वार के बाहर हुआ है, जहां कांग्रेस सांसद भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और सांसदों के निलंबन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे।
संसद के बाहर हुआ आमना-सामना
कांग्रेस सांसद मकर द्वार पर धरना दे रहे थे, तभी रवनीत सिंह बिट्टू वहां से गुजरते नजर आए। इस दौरान राहुल गांधी काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। बिट्टू ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है जैसे ये जंग जीतकर लौटे हों।
इस टिप्पणी पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए बिट्टू की ओर इशारा किया और उन्हें गद्दार कह दिया। आसपास मौजूद कांग्रेस सांसदों ने इस पर ठहाके लगाए और नारेबाजी शुरू कर दी।
‘हाथ मिलाइए मेरे गद्दार दोस्त’
इसके बाद राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू की ओर हाथ बढ़ाते हुए कहा, हैलो भाई, मेरे गद्दार दोस्त… चिंता मत करो, तुम वापस कांग्रेस में आ जाओगे। हालांकि बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और जवाब में कहा कि वे देश के दुश्मन से हाथ नहीं मिलाएंगे।
दिलचस्प बात यह रही कि तीखे शब्दों के बावजूद दोनों नेताओं के चेहरे पर मुस्कान बनी रही, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह राजनीतिक तंज कसाव का हिस्सा था।
बिट्टू का राजनीतिक सफर
रवनीत सिंह बिट्टू, जो पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, 2024 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। बीजेपी में जाने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ में कहा था कि उन्हें पंजाब के लिए उनके स्नेह और प्रतिबद्धता ने प्रभावित किया।
वर्तमान में बिट्टू राज्यसभा सांसद हैं और रेल मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस का हमला
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कांग्रेस का भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विरोध कर रहा था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने दबाव में आकर यह समझौता किया है, जिससे भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सौदा महीनों तक रुका रहा, लेकिन अचानक इसे अंतिम रूप दे दिया गया। कांग्रेस का दावा है कि देश को इस समझौते और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय दबावों पर स्पष्ट जवाब चाहिए।
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