सोनम वांगचुक सुनवाई: केंद्र सरकार ने कहा है कि सोनम वांगचुक लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश जैसा बनाना चाहते हैं।
केंद्र की ओर से यह भी दलील दी गई कि वांगचुक ने ‘अरब स्प्रिंग’ की अवधारणा का जिक्र कर जेन-Z को भड़काने की कोशिश की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि अरब स्प्रिंग के दौरान कई देशों में हिंसा हुई थी और कुछ देशों की सरकारें गिर गई थीं।
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर उनकी पत्नी गितांजलि जे अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत वांगचुक की गिरफ्तारी को चुनौती दी है।
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इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने की।
पिछली सुनवाई में गितांजलि अंगमो की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि हिरासत आदेश पुराने एफआईआर पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि वांगचुक के वीडियो के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से पेश किया गया है और उन्होंने किसी भी हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की।
सरकार के अनुसार, सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें जोधपुर स्थानांतरित किया गया।
यह कार्रवाई लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद की गई थी, जिनमें चार लोगों की मौत हुई और करीब 90 लोग घायल हुए थे। सरकार ने आरोप लगाया है कि वांगचुक ने इन हिंसक घटनाओं को भड़काने में भूमिका निभाई।
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