Budget 2026: राहत, रफ्तार और सुधार का रोडमैप — जानिए इस बजट में आम आदमी से लेकर उद्योग तक को राहत मिलेगी।
देश की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाले दिन 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। यह बजट ऐसे समय में आया है जब घरेलू मांग मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ नीति और आर्थिक अनिश्चितता की छाया बनी हुई है।
बजट 2026-27 में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता विकास, रोजगार, निवेश और स्थिरता के संतुलन पर टिकी है। इस बजट में टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश बढ़ाने, MSME और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देने, इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने और ग्रीन व डिजिटल इकोनॉमी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
टैक्स और वित्तीय सुधार: सिस्टम सरल, बोझ हल्का करने की कोशिश की गई
बजट 2026 में सरकार ने टैक्स ढांचे को कम जटिल और ज्यादा भरोसेमंद बनाने की दिशा में कई अहम फैसले लिए हैं। गैर-ऑडिट ट्रस्ट्स के लिए टैक्स फाइलिंग की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है, जबकि ITR-1 और ITR-2 के लिए 31 जुलाई की समय सीमा तय की गई है।
रिटर्न में संशोधन की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाई गई है, जिससे टैक्सपेयर्स को राहत मिली।
इनकम टैक्स एक्ट के राहत खातों की अनुपस्थिति को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है और अभियोजन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। न्यूनतम कर भुगतान (MAT) की दर 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे कॉरपोरेट सेक्टर को राहत मिलेगी।
सरकार ने यह भी साफ किया कि नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसके नियम व फॉर्म्स समय से पहले जारी किए जाएंगे ताकि टैक्सपेयर्स को बदलावों को समझने में दिक्कत न हो, राजकोषीय अनुशासन पर जोर दटेट हुए।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत रखा गया है, जो चालू वित्त वर्ष से कम है। सरकार का मानना है कि इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा।
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र: राहत भी, भविष्य की तैयारी भी
इस बजट का एक बड़ा फोकस स्वास्थ्य और मानव पूंजी पर रहा। सरकार ने 17 एंटी-कैंसर दवाओं को बेसिक कस्टम ड्यूटी से मुक्त करने का ऐलान किया है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सस्ता होगा।
आयुष सेक्टर को मजबूती देते हुए तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है। आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि जामनगर स्थित WHO के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को और सशक्त किया जाएगा।
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने हर जिले में एक गर्ल हॉस्टल बनाने की घोषणा की है, जिससे उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ेगी। उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालय टाउनशिप और स्किल आधारित प्रशिक्षण पर निवेश बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
सरकार ने कहा कि सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का मुख्य इंजन बनाने के लिए Education to Employment and Enterprise पर एक स्थायी समिति बनाई जाएगी, जो युवाओं के लिए रोजगार और कौशल से जुड़ी नीतियों की सिफारिश करेगी।
MSME, उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की रफ्तार
बजट 2026 में MSME सेक्टर को सबसे बड़ा बूस्टर मिला है। सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये का SME ग्रोथ फंड बनाने का ऐलान किया है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को पूंजी की आसान उपलब्धता होगी।
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS प्लेटफॉर्म से जोड़ने का फैसला लिया गया है, ताकि MSME को भुगतान समय पर मिल सके। TReDS को अनिवार्य सेटलमेंट प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
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मैन्युफैक्चरिंग को गति देने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना का बजट बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये करना और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना, हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम तथा मेगा टेक्सटाइल पार्क की घोषणा से रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद की।
इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल और ग्रीन ट्रांसपोर्ट: विकास का मजबूत आधार
इंफ्रास्ट्रक्चर बजट 2026 का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 में पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपए किया गया है।
देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के लिए 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान किया गया है, जिनमें दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलीगुड़ी, मुंबई-पुणे और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे रूट शामिल हैं।
ग्रीन ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग विकसित किए जाएंगे। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रीन इंडस्ट्री को नई दिशा मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर पर यह निवेश न सिर्फ रोजगार पैदा करेगा, बल्कि लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की नीव भी मजबूत करेगा।
डिजिटल, ग्रीन और ग्लोबल इंडिया: 2047 की तैयारी
बजट 2026 का एक बड़ा संदेश यह है कि भारत खुद को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार कर रहा है। क्लाउड सर्विसेज़ को 2047 तक टैक्स हॉलिडे देने की घोषणा, डेटा सेंटर और डिजिटल इकोसिस्टम को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का संकेत है।
ऑरेंज इकोनॉमी, AVGC सेक्टर और क्रिएटिव इंडस्ट्री में लाखों रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए स्कूलों और कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित किया गया।
सरकार ने यह भी कहा कि भारत को मेडिकल टूरिज्म हब बनाने के लिए पांच क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ विदेशी निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा मिला।
कुल मिलाकर Budget 2026 को राहत + रफ्तार + सुधार का बजट कहा गया है। इसमें टैक्स सिस्टम को सरल करने, स्वास्थ्य-शिक्षा को मजबूत करने, MSME और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए ग्रोथ को गति देने की साफ रणनीति दिखती है।
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