पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगालकी राजनीति में एक बार फिर सिंगूर और मालदा केंद्र में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते एक महीने में दो बार राज्य का दौरा कर साफ संकेत दे दिए हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में BJP की रणनीति दो ध्रुवों पर टिकी है हिंदू बहुल क्षेत्रों में विकास और रोजगार, जबकि मुस्लिम बहुल इलाकों में घुसपैठ और हिंदुत्व का संदेश।
सिंगूर वही इलाका है, जिसने 2008 में बंगाल की राजनीति की दिशा बदली थी। तब वाम सरकार के दौरान टाटा मोटर्स की नैनो फैक्ट्री का विरोध हुआ और आंदोलन की अगुआई करते हुए ममता बनर्जी सत्ता तक पहुंचीं। आज 18 साल बाद वही सिंगूर BJP के लिए भी चुनावी प्रतीक बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगूर की रैली में सीधे टाटा फैक्ट्री की वापसी का जिक्र नहीं किया, लेकिन विकास, रोजगार, निवेश, कानून-व्यवस्था और सिंडिकेट राज खत्म करने की बात जोर-शोर से रखी। यहीं से BJP प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने अगले दिन ऐलान कर दिया कि सिंगूर में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री वापस लाई जाएगी। यह बयान अपने आप में बड़ा सियासी संकेत हो सकता है।
स्थानीय लोगों में इस मुद्दे को लेकर भावनात्मक जुड़ाव आज भी कायम है। सिंगूर के लोगों का मानना है कि फैक्ट्री जाने से न सिर्फ नौकरियां खत्म हुईं, बल्कि पूरा स्थानीय कारोबार चौपट हो गया। BJP इसी अधूरी उम्मीद को भुनाने की कोशिश में है। सिंगूर के जरिए भाजपा पार्टी यह संदेश दे रही है कि ममता बनर्जी ने जिस विकास को रोका, BJP उसे लौटाएगी।
दूसरी ओर, मालदा में तस्वीर बिल्कुल अलग है। आम के लिए मशहूर यह जिला करीब 63% मुस्लिम आबादी वाला है और बांग्लादेश सीमा से सटा होने के कारण घुसपैठ का मुद्दा यहां हमेशा से सियासी हथियार रहा है। मालदा की रैली में पीएम मोदी ने साफ कहा कि
“घुसपैठ बंगाल की सबसे बड़ी समस्या है”
और इसे गरीबों व मेहनतकशों के हक छीनने से जोड़ा।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक BJP का फोकस यहां मुस्लिम वोट हासिल करने से ज्यादा, हिंदू वोटों को एकजुट करने पर है। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर तीनों जिलों में मुस्लिम आबादी बहुल है, लेकिन SC-ST और आदिवासी इलाकों में BJP की पकड़ धीरे-धीरे मजबूत हुई है। पिछले चुनाव में हबीबपुर जैसी आदिवासी सीट इसका उदाहरण रही।
BJP को यह भी उम्मीद है कि मुस्लिम वोटों का बिखराव उसे अप्रत्यक्ष फायदा पहुंचाएगा। TMC से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर की नई पार्टी और AIMIM की सक्रियता इस समीकरण को और जटिल बनाती है। यदि मुस्लिम वोट बंटते हैं, तो कम प्रतिशत के साथ भी BJP कई सीटों पर जीत दर्ज कर सकती है।
कुल मिलाकर, सिंगूर से BJP ने विकास और रोजगार का नैरेटिव खड़ा किया है, जबकि मालदा से घुसपैठ और हिंदुत्व का। इन दोनों ध्रुवों के सहारे पार्टी हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की करीब 59 विधानसभा सीटों पर एक साथ निशाना साध रही है। सवाल सिर्फ इतना है क्या सिंगूर में टाटा की फैक्ट्री वाकई लौटेगी, या यह भी चुनावी वादों की सूची में एक और नाम बनकर रह जाएगी? बंगाल की राजनीति में इसका जवाब चुनाव नतीजों के साथ ही सामने आएगा।
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