नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 3488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अरुणाचल प्रदेश में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की चार और बटालियन तैनात करने का निर्णय लिया है। इसी साल फरवरी में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आईटीबीपी को 9,400 कर्मियों की नई ताकत के साथ सात नई बटालियनों और एक परिचालन सीमा आधार बनाने के लिए मंजूरी दी है। 7 बटालियनों में से चार अब तैनाती के लिए तैयार हैं, जबकि बाकी तीन गठन की प्रक्रिया में हैं।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक देश की उत्तरी सीमा पर 47 नई सीमा चौकियां (बीओपी) और एक दर्जन ‘स्टेजिंग कैंप’ हैं। भारतीय और चीनी सेनाएं 2020 से ही लद्दाख में तनावपूर्ण स्थिति में तैनात हैं। इस क्षेत्र में चीन के मुकाबले रणनीतिक रूप से बढ़त हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य बातचीत के माध्यम से लद्दाख में सीमा को लेकर जारी विवाद को हल करने का प्रयास कर रहे हैं। सीमा विवाद को लेकर हाल ही में सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत की गई थी। जिसमें शेष विवादित क्षेत्र से सैनिकों को हटाने पर बातचीत की गई।
जवानों की तैनाती के भौगोलिक वितरण पर जोर देते हुए, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि 47 बीओपी में से 34 रणनीतिक रूप से अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाके में स्थित हैं, जबकि शेष चौकियां पश्चिमी थिएटर में स्थित होंगी। इस कदम का उद्देश्य मुख्य भूमि में आगे की स्थिति और इकाइयों के बीच आईटीबीपी सैनिकों की क्षमता को बढ़ाना है। सूत्रों के मुताबिक़ स्टेजिंग कैंप हिमालयी सीमा पर लंबी दूरी की गश्त के दौरान आईटीबीपी को राशन, रसद और रहने की जगह मुहैया कराएंगे। स्टेजिंग कैंप अस्थायी बीओपी के रूप में कार्य करते हैं और कठिन सीमा पर अंतर-बीओपी दूरी को कम करते हैं। आईटीबीपी, भारतीय सेना के साथ मुख्य रूप से चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) की रक्षा के लिए तैनात है। जो लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से लगती है।
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