Vikramaditya Vedic Clock

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भोपाल CM हाउस पर विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण, मुख्यमंत्री ने मोबाइल ऐप का भी किया लोकार्पण

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Vikramaditya Vedic Clock: भोपाल के मुख्यमंत्री निवास पर ऐतिहासिक पहल की गई।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनिर्मित प्रवेश द्वार पर स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अनावरण किया।

यह घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित है और इसे विश्व की पहली वैदिक घड़ी बताया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान सीएम ने वैदिक घड़ी से जुड़े मोबाइल ऐप का भी लोकार्पण किया।

इस अवसर पर मंत्री विश्वास सारंग, मंत्री कृष्णा गौर, भोपाल सांसद आलोक शर्मा, विधायक रामेश्वर शर्मा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल समेत कई नेता और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

समय की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की प्राचीन गणना पद्धति हमेशा से अद्भुत और वैज्ञानिक रही है।

हमारी परंपरा में समय की गणना सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होती है।

जबकि पश्चिमी पद्धति में रात 12 बजे दिन बदल जाता है, जिसका कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में 60 सेकेंड के मिनट का अस्तित्व नहीं था, बल्कि 30 घंटे को 30 मुहूर्तों में बांटा गया था।

यह सिर्फ समय देखने का साधन नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और ज्ञान परंपरा की धरोहर है।

सीएम ने कहा कि भारत का सेंटर पॉइंट उज्जैन माना गया है, हालांकि समय के साथ यह खिसककर 32 किमी दूर डोंगला पहुंचा।

भगवान श्रीकृष्ण भी समय गणना के रहस्य को समझने के लिए डोंगला के पास नारायणा गांव आए थे। वहां उनके साथ बलराम और सुदामा भी मौजूद थे।

उन्होंने दावा किया कि 10 हजार साल पहले कब सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण हुआ था, इसकी सटीक जानकारी हमारी वैदिक गणना पद्धति तुरंत बता देती है।

यह क्षमता आज का कंप्यूटर भी तुरंत नहीं दिखा सकता।

उन्होंने सावन में छाता लेकर चलने की परंपरा का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भी हमारे पूर्वजों की अनुभवजन्य गणना का ही परिणाम है।

ग्रह, नक्षत्र और तिथियों के आधार पर जीवन के हर निर्णय तय होते थे।

यही कारण है कि विधानसभा में भी परंपराओं को महत्व देते हुए अमावस्या के दिन अवकाश रखने का प्रयास किया गया।

भारत के समय की नई परिभाषा लिखी जा रही

कार्यक्रम में भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा वैदिक घड़ी स्थापित करना वास्तव में भारत के समय की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक कदम है।

उन्होंने कहा कि जब हम मां की कोख में आते हैं तो ईश्वर हमारा प्रारब्ध लिख देता है।

वैदिक घड़ी हमें उसी काल गणना से जोड़ेगी और भारत को फिर से “सोने की चिड़िया” बनाने की दिशा में ले जाएगी।

मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि मुख्यमंत्री निवास आज विरासत और विकास दोनों का साक्षी बन रहा है।

इस घड़ी के माध्यम से युवाओं को अपने स्वाभिमान और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के युवा दुनिया भर में नाम रोशन कर रहे हैं और मुख्यमंत्री का संबल उनके साथ है।

विश्व की पहली वैदिक घड़ी, संस्कृति और आधुनिकता का संगम

सीएम के संस्कृति सलाहकार श्रीराम तिवारी ने कहा कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारतीय काल गणना पर आधारित विश्व की पहली घड़ी है।

इसका पुर्नस्थापन सबसे पहले 29 फरवरी 2024 को उज्जैन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था। तब से इसे देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।

अब यह भोपाल के मुख्यमंत्री निवास पर स्थापित होकर एक नई पहचान बन गई है।

कार्यक्रम में उपस्थित मंत्री विश्वास सारंग ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर मंत्रियों को भी एक-एक घड़ी भेंट कर दी जाए तो वे इसे अपने घरों में स्थापित कर सकेंगे।

वहीं मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से कहा कि वैदिक घड़ी का मोबाइल ऐप अपने फोन में डाउनलोड करें और समय देखने के इस अनूठे अनुभव को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने सभी से अपने मोबाइल की टॉर्च ऑन करवाकर एकता और ज्ञान के प्रकाश का संदेश दिया।

शौर्य स्मारक से निकली रैली, युवाओं से संवाद

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण युवाओं की रैली रही। शौर्य स्मारक पर बड़ी संख्या में कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं एकत्रित हुए।

यहां से रवींद्र भवन तक बाइक रैली निकाली गई। रवींद्र भवन में वाहन पार्क कर छात्र पैदल मार्च करते हुए मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री निवास पर “विक्रमादित्य वैदिक घड़ी: भारत के समय की पुनर्स्थापना” विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

इस दौरान सीएम डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से सीधा संवाद किया और उनसे आह्वान किया कि वे इस वैदिक धरोहर को प्रचार-प्रसार में शामिल करें।

कार्यक्रम के दौरान उज्जैन से आए 51 ब्राह्मणों ने भी भाग लिया और वैदिक परंपरा का महत्व बताया।

 

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