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यौन उत्पीड़न, ड्रग तस्करी और जमीन पर कब्जे के मामले में फंसे मछली परिवार ने फिर विश्वास हासिल कर लिया है। परिवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है… या यूं कहें कि मछली परिवार की सिस्टम से सेटिंग हो गई है…
तभी तो पहले जमीन पर अवैध कब्जों पर प्रशासन ने राहत दी और कहा कि फाइन भरकर कब्जाधारी रेगुलर हो सकते हैं और अब कोर्ट से मछली परिवार के फ्रीज खातों को भी बहाल कर दिया गया।
पॉलिटिक्सवाला ने पहले ही ये अंदेशा जताया था कि मछली परिवार की सम्पत्तियों पर कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। कानूनी रूप से उन पर कोई एक्शन नहीं होगा। ये सच साबित हुआ। मीडिया में जिनको दोषी बताया गया, नेताओं ने जिनको लेकर खूब सवाल उठाकर जनता की शाबाशी बटोरी।
किसी को नहीं बख्शेंगे वाले बयान सिर्फ ब्यान साबित हुए। सरकारी जमीन पर कब्ज़ों सहित किसी मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई। सिर्फ जुर्माना भरकर
कब्ज़ों को रेगुलर कर दिया गया।
यही तो सरकार के साथ मछली परिवार का विश्वास है।
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यासीन अहमद मछली के परिवार से जुड़े 9 लोगों को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से ये राहत मिली है। कोर्ट ने दो दिन पहले याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके फ्रीज किए गए बैंक खातों को डी-फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।वहीं, मछली परिवार से जुड़े लोगों के घर ढहाने पर सरकार से जवाब भी मांगा है।
जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने 26 सितंबर को याचिका की सुनवाई करते भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह और क्राइम ब्रांच के डीसीपी अखिल पटेल को गवाही के लिए बुलाया था। तब दोनों अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होकर स्वीकार किया था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी क्रिमिनल केस दर्ज नहीं हुआ है।
हालांकि आरोपी के खाते से पिटीशनर के अकाउंट में एक बड़ी रकम का ट्रांजेक्शन हुआ है, जिसकी जांच पेंडिंग है। हाईकोर्ट ने कहा कि मामले पर भोपाल पुलिस अपनी जांच को जारी रखे साथ ही मछली परिवार से जुड़े लोगों के घर ढहाने पर सरकार विस्तृत जवाब दे।
जस्टिस विशाल मिश्रा ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि अगर याचिकाकर्ताओं पर कोई अपराध दर्ज नहीं है, तो बैंक खातों को फ्रीज नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैंक खातों को डी-फ्रीज करते हुए आरबीआई के नियमों के तहत ट्रांजेक्शन किया जा सके। याचिकाकर्ता के खातों से RBI लिमिट से ज्यादा का कैश विड्रॉल ना हो।
मछली परिवार की साजिदा-बी के साथ 9 अन्य सदस्यों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया था कि सरकार ने कार्रवाई के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, जिसे लेकर यह याचिका दायर की गई है। भोपाल के आनंदपुरा में रहने वाली साजिदा बी एवं अन्य 7 लोगों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए बताया गया कि उनके नाम एफआईआर में नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई अपराधी की जांच चल रही है।
इसके बावजूद भी यासीन के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही उनकी संपत्ति तोड़ी गई, बैंक खाता भी फ्रीज किए गए। यहां तक कि उनके ईमेल भी ब्लॉक कर दिए गए।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि किसी आपराधिक मामले में अभियुक्त नहीं हैं, फिर भी उनके घरों को तोड़ा गया। 21 अगस्त 2025 को जब प्रशासन ने संपत्ति ध्वस्त करने को लेकर कार्रवाई की थी तो कोई भी वैद्य नोटिस या उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अन्य सरकारी जमीन पर रह रहे हैं, लेकिन केवल उन्हें ही निशाना बनाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिना अभियोग के घरों को तोड़ना, बैंक खाता सीज करना और हथियार लाइसेंस निलंबित करना संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो याचिकाकर्ता अपनी जगह सही हैं और कोर्ट ने भी कानून के हिसाब से फैसला सुनाया, लेकिन सवाल पुलिस और प्रशासन पर है…
क्योंकि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा अपराध है तो मछली परिवार के बाकी सदस्यों पर भी केस दर्ज होना चाहिए था, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया जिसका फायदा मछली परिवार के सदस्यों ने उठाया…
पॉलिटिक्सवाला ने पहले इसकी आशंका जताई थी कि मछली परिवार फिर से विश्वास हासिल कर लेगा और मामला रफा दफा हो जाएगा…
हो भी यही रहा है…केस दर्ज न करना, कागजों में कमी, कमजोर धाराएं इसी ओर इशारा करती हैं।
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