गुजरात हाईकोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे में नॉनवेज बिक्री पर लगी रोक हटाई। छह रेस्टोरेंट मालिकों की याचिका पर आया अहम फैसला।
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज यानी मांसाहारी भोजन की बिक्री पर गुजरात सरकार की ओर से लगाई गई रोक को हटा दिया है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को अदालत ने इस संबंध में दायर याचिका स्वीकार करते हुए सरकार की अधिसूचना को निरस्त कर दिया।
खास बात यह रही कि फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद राज्य सरकार ने आदेश पर सात दिनों की रोक लगाने की मांग की, ताकि वह इसे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दे सके। हालांकि, अदालत ने सरकार की इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
इस फैसले के बाद सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज भोजन की बिक्री दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
यह मामला गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के आसपास मांसाहारी भोजन की बिक्री से जुड़ा है। छह रेस्टोरेंट संचालकों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार के उस प्रतिबंध को चुनौती दी थी,
जिसके तहत मंदिर की ओर जाने वाली निर्धारित सड़कों और मंदिर के 500 मीटर के दायरे में नॉनवेज भोजन की बिक्री, भंडारण, वितरण और तैयारी पर रोक लगाई गई थी। याचिकाकर्ताओं में जेएम रेस्टोरेंट, ख्वाजा हिंदुस्तान रेस्टोरेंट, न्यू गुलाब, किस्मत रेस्टोरेंट और ताज रेस्टोरेंट शामिल थे।
राज्य सरकार ने अदालत में प्रतिबंध का बचाव करते हुए कहा था कि सोमनाथ मंदिर का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सरकार की ओर से दलील दी गई कि वर्ष 2026 में करीब 1.2 करोड़ श्रद्धालुओं ने सोमनाथ के दर्शन किए।
ऐसे में तीर्थयात्रियों और पदयात्रियों के लिए निर्धारित रास्तों पर मांसाहारी भोजन की बिक्री को नियंत्रित करना जरूरी है। सरकार ने ऋषिकेश, हरिद्वार, अमृतसर और मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक स्थलों पर लागू व्यवस्थाओं का भी हवाला दिया।
सोमनाथ मंदिर परिसरात मांसाहारी पदार्थांच्या विक्रीवरील बंदी रद्द; गुजरात उच्च न्यायालयाचा महत्त्वपूर्ण निर्णय!
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— LoksattaLive (@LoksattaLive) October 30, 2026
दूसरी ओर, रेस्टोरेंट संचालकों की ओर से पेश वकील एएल मंसूरी ने तर्क दिया कि गुजरात पुलिस अधिनियम की धारा 33(1)(w) के तहत अधिकारियों को रेस्टोरेंट में नॉनवेज भोजन की बिक्री पर इस तरह का प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि संबंधित रेस्टोरेंट कई दशकों से संचालित हो रहे हैं और वहां शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों तरह का भोजन परोसा जाता है। प्रतिबंध से संचालकों के कारोबार के साथ-साथ सैकड़ों कर्मचारियों की आजीविका पर भी असर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि उनके प्रतिष्ठानों के कारण किसी तरह की हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या सामने नहीं आई है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि में वर्ष 2006, 2018 और 2019 की अधिसूचनाएं भी शामिल हैं। वर्ष 2006 में सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे और मंदिर से बस स्टैंड तक जाने वाली सड़क पर अंडे, मांस और मछली की बिक्री तथा भंडारण को प्रतिबंधित किया गया था।
इसके बाद 2018 में वेरावल-पाटन संयुक्त नगरपालिका ने कुछ प्रमुख सड़कों को शाकाहारी क्षेत्र बनाने की पहल की थी। वर्ष 2019 में प्रतिबंध का दायरा कुछ अन्य सड़कों तक बढ़ाया गया। जुलाई 2026 में नई अधिसूचना जारी हुई, जिसे अगस्त में अंतिम रूप दिया गया था।
फिलहाल गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला धार्मिक स्थलों के आसपास खाद्य कारोबार पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों और स्थानीय व्यापारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बहस खड़ी करता है।
अदालत के विस्तृत आदेश की प्रति खबर लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं थी। इसलिए पुराने प्रतिबंधों और नए आदेश के बीच कानूनी स्थिति की पूरी तस्वीर विस्तृत आदेश सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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