Thalapathy Vijay: TVK प्रमुख थलापथी विजय ने सोमवार को करूर भगदड़ हादसे के पीड़ितों से मुलाकात की।
यह मुलाकात महाबलीपुरम के एक निजी रिसॉर्ट में की गई, जहां करीब 200 लोग मौजूद थे।
इनमें 37 पीड़ित परिवार और कुछ घायल शामिल थे। हादसे को आज ठीक एक महीना पूरा हो चुका है।
विजय ने हर परिवार से अलग-अलग बंद कमरे में मुलाकात की और उनकी बातें सुनीं।
इस मुलाकात में मीडिया को एंट्री नहीं दी गई। अंदर केवल TVK के पदाधिकारी और पीड़ित परिवारों के सदस्य मौजूद रहे।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, विजय ने सभी परिवारों से कहा कि वे उनके दर्द को समझते हैं और घटना ने उन्हें भी गहरा आघात पहुंचाया है।
हालांकि, परिवारों को चेन्नई बुलाने के फैसले पर सवाल उठे हैं कि विजय खुद करूर क्यों नहीं गए।
पार्टी सूत्रों ने कहा कि अगर विजय करूर जाते तो फिर से भीड़ जमा हो जाती, जिससे सुरक्षा और नियंत्रण की स्थिति बिगड़ सकती थी।
जानें हादसे में क्या हुआ था?
27 सितंबर 2025 को करूर में विजय की रैली के दौरान लगभग 50 हजार लोग पहुंच गए थे, जबकि मैदान की क्षमता केवल 10 हजार थी।
कार्यक्रम में लगभग 7 घंटे की देरी हुई। इसी दौरान एक बच्ची के लापता होने की अफवाह फैल गई, जिसके बाद भीड़ में भगदड़ मच गई।
इस हादसे में 41 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
तमिलनाडु पुलिस प्रमुख जी वेंकटारमन ने बताया था कि यह अव्यवस्थित भीड़ नियंत्रण की वजह से बड़ी त्रासदी में बदल गया।
TVK की ओर से हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। घायल लोगों को भी आर्थिक मदद दी।
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भीड़ कंट्रोल के लिए 10 दिन में SOP बने
हादसे के बाद मद्रास हाईकोर्ट ने TVK और विजय को फटकार लगाई थी।
अदालत ने कहा था कि घटना के बाद पार्टी की ओर से न तो सार्वजनिक माफी मांगी गई और न ही कोई स्पष्ट जिम्मेदारी स्वीकार की गई।
साथ ही, अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) गठित की, जिसकी अगुवाई तमिलनाडु पुलिस के IG असरा गर्ग कर रहे हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को 10 दिनों के भीतर राजनीतिक और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए Standard Operating Procedure (SOP) तैयार करने को कहा है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता जे. रविंद्रन ने अदालत को बताया कि SOP तैयार होने तक किसी भी राजनीतिक दल को रैलियां और रोड शो की अनुमति नहीं दी जाएगी।
हालांकि, सार्वजनिक सभाएं आयोजित की जा सकेंगी, पर नियंत्रित और सीमित ढंग से।
पीठ ने कहा कि अगर राज्य सरकार 10 दिन में SOP नहीं देती, तो अदालत स्वयं आदेश पारित करेगी।
अब मामले अगली सुनवाई की तारीख 11 नवंबर तय की गई है। AIADMK ने भी मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी है।
SIT रिपोर्ट आने के बाद घटना की जिम्मेदारी, लापरवाही और कानूनी कार्रवाई तय होगी।
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