नई दिल्ली
देश में वंदे भारत ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी के बीच रेलवे बोर्ड ने कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में बनी पहली 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार को चलाने की मंजूरी दे दी है. हालांकि, इस ट्रेन को लेकर कई तकनीकी कमियां भी सामने आई हैं. इनमें ड्राइवर की टचस्क्रीन का ठीक से काम नहीं करना, बिजली की खराबी का पता लगाने में परेशानी और अग्निशामक यंत्रों के कवर का ढीला होना शामिल है।
रेलवे बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को इन कमियों को जल्द दूर करने का निर्देश दिया है. खास बात यह है कि ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की मंजूरी मिलने के बावजूद यह फिलहाल 130 किलोमीटर प्रति घंटे से तेज नहीं दौड़ सकेगी।
160 की मंजूरी, फिर 130 की रफ्तार क्यों?
रेलवे बोर्ड ने आरसीएफ, कपूरथला में बनी नई वंदे भारत चेयर कार को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाने की मंजूरी दी है. लेकिन एक वरिष्ठ जोनल अधिकारी के मुताबिक, रेलवे नेटवर्क पर लागू रफ्तार संबंधी प्रतिबंधों के कारण ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही सीमित रहेगी।
यानी ट्रेन को तकनीकी रूप से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए मंजूरी मिल गई है, लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों के चलते इसका पूरा फायदा नहीं मिल सकेगा. रेलवे बोर्ड ने संचालन की मंजूरी देते समय कई तकनीकी खामियों की पहचान भी की है, जिन्हें दूर करना जरूरी है।
पहली बार कपूरथला RCF में बनी ट्रेन
अब तक चल रही सभी वंदे भारत चेयर कार ट्रेनें चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में बनाई गई हैं. लेकिन यह पहली 16 कोच वाली वंदे भारत चेयर कार है, जिसे कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री ने तैयार किया है. इसमें एल्सटॉम (Alstom) का प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रेन को चलाने के लिए जरूरी शक्ति उपलब्ध कराता है. रेलवे बोर्ड ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में इस ट्रेन की कई तकनीकी कमियों का जिक्र किया है. यह पत्र रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO), जोनल रेलवे, रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त और रेलवे सुरक्षा आयुक्तों को भेजा गया है।
मिनिएचर सर्किट ब्रेकर को लेकर निर्देश
रेलवे बोर्ड ने ट्रेन के इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट (ECC) में लगे मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) को लेकर चिंता जताई है. एमसीबी बिजली के सर्किट को खराबी या ओवरलोड की स्थिति में सुरक्षित रखने का काम करता है. रेलवे बोर्ड के मुताबिक, नई वंदे भारत में लगे एमसीबी सिंगल पोल वाले हैं, जबकि पहले की वंदे भारत चेयर कार में डबल पोल एमसीबी दिए गए थे. बोर्ड ने कहा है कि इस अंतर के कारण किसी खराबी की स्थिति में उसका पता लगाने में परेशानी हो सकती है. रेलवे बोर्ड ने आरसीएफ को इस ट्रेन में जल्द से जल्द जरूरी सुधार करने का निर्देश दिया है. साथ ही, भविष्य में बनने वाली सभी ट्रेनों में डबल पोल एमसीबी लगाने को कहा गया है।
एमसीबी पर लेबल नहीं होने से दिक्कत
रेलवे बोर्ड ने इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट में लगे एमसीबी पर स्पष्ट पहचान चिह्न नहीं होने की समस्या भी उठाई है. इन लेबल से पता चलता है कि कौन-सा एमसीबी ट्रेन के किस उपकरण को नियंत्रित करता है. उदाहरण के लिए, अगर किसी कोच की लाइट काम करना बंद कर दे, तो टेक्नीशियन को खराबी का पता लगाने के लिए इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट खोलना पड़ता है. अगर एमसीबी पर सही लेबल नहीं होंगे, तो यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि लाइटिंग सिस्टम से जुड़ा कौन-सा सर्किट खराब है. इससे मरम्मत में ज्यादा समय लग सकता है. बोर्ड ने आरसीएफ को सभी एमसीबी पर स्पष्ट और सही लेबल लगाने का निर्देश दिया है।
ट्रैक्शन मोटर की क्षमता पर भी सवाल
रेलवे बोर्ड ने नई वंदे भारत में लगी ट्रैक्शन मोटर की रेटिंग की जांच करने को भी कहा है. ट्रैक्शन मोटर बिजली को मैकेनिकल पावर में बदलती है, जिससे ट्रेन के पहिए घूमते हैं. नई ट्रेन में लगी ट्रैक्शन मोटर की रेटिंग 270 किलोवाट है. वहीं, दूसरी कंपनियों की ओर से बनाई गई वंदे भारत ट्रेनों में मेधा की मोटर की रेटिंग 210 किलोवाट और सीमेंस की मोटर की रेटिंग 225 किलोवाट बताई गई है. इस अंतर को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आरडीएसओ और आरसीएफ को जांच करने का निर्देश दिया है कि ज्यादा रेटिंग वाली मोटर तकनीकी रूप से उचित है या नहीं. यानी इस मामले में अभी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
ट्रेन ड्राइवर की टचस्क्रीन में भी दिक्कत
नई वंदे भारत में ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर के लिए लगी ड्राइवर डिस्प्ले यूनिट (DDU) की टचस्क्रीन को लेकर भी शिकायत सामने आई है. रेलवे बोर्ड के मुताबिक, स्क्रीन टच करने पर ठीक से प्रतिक्रिया नहीं देती, जिससे इसे चलाने में परेशानी होती है. डीडीयू ट्रेन के संचालन से जुड़ी जरूरी जानकारियां दिखाती है और लोको पायलट को ट्रेन के विभिन्न सिस्टम की निगरानी में मदद करती है. ऐसे में स्क्रीन की टच सेंसिटिविटी खराब होने से इसका इस्तेमाल मुश्किल हो सकता है. बोर्ड ने इस कमी को जल्द दूर करने के लिए कहा है, ताकि लोको पायलट को ट्रेन चलाने के दौरान परेशानी न हो।
अग्निशामक यंत्रों के कवर भी ढीले मिले
रेलवे बोर्ड ने कोच में लगे अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) के कवर को लेकर भी सवाल उठाए हैं. बोर्ड के मुताबिक, अग्निशामक यंत्रों पर लगे ऐक्रेलिक दरवाजे सुरक्षित नहीं हैं और ढीले हैं. बोर्ड ने इन्हें सही तरीके से कसने और सुरक्षित करने का निर्देश दिया है. आग लगने जैसी आपात स्थिति में अग्निशामक यंत्रों तक आसानी से पहुंचना जरूरी होता है. इसलिए इनके कवर की सही स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
वंदे भारत स्लीपर को लेकर भी तैयारी तेज
इस बीच, वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को लेकर भी रेलवे की तैयारियां जारी हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को 1 नवंबर को हरी झंडी दिखाई जानी है. वहीं, चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक अंतिम रूप देने की तैयारी में है. इस ट्रेन के डिजाइन और तकनीकी विवरण पर लंबे समय से काम चल रहा है।
You may also like
-
मुंबई एयरपोर्ट पर तकनीकी खराबी से कामकाज प्रभावित, सर्वर में गड़बड़ी के बाद मचा हड़कंप
-
5 राज्यों में चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, यूपी-पंजाब समेत कई राज्यों में अधिकारियों के होंगे तबादले
-
रेल यात्रियों के लिए जरूरी खबर: दिल्ली आने-जाने वाली 45 ट्रेनों का बदला रूट और टाइमिंग, सफर से पहले चेक करें शेड्यूल
-
‘बेईमानी की तो जीवनभर याद रखोगे’, नितिन गडकरी की सख्त चेतावनी से मचा हड़कंप
-
2029 चुनाव से पहले INDI गठबंधन में शामिल होंगे जगन मोहन रेड्डी? YSRCP की रणनीति पर सियासी चर्चा तेज
